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श्री राम कथा महायज्ञ : अधर्म बढ़ने पर भगवान लेते हैं अवतार, राम जन्म पर गूंजे जयकारे

Pragya News 24

Fri, Mar 13, 2026
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आगरा। जब-जब पृथ्वी पर अधर्म और अत्याचार बढ़ता है, तब-तब भगवान विभिन्न अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हैं और भक्तों की रक्षा करते हैं। भगवान के प्रत्येक अवतार का उद्देश्य मानवता को सही मार्ग दिखाना और समाज में धर्म, न्याय और करुणा की स्थापना करना होता है। गणेश दुर्गा महोत्सव कमेटी के तत्वावधान में लंगड़े की चौकी, शास्त्री नगर स्थित श्री हनुमंत धाम में चल रही 10 दिवसीय श्रीराम कथा के तृतीय दिवस पर भगवान के विभिन्न अवतारों की महिमा तथा श्रीराम जन्म का भावपूर्ण वर्णन किया गया। राम जन्म प्रसंग के दौरान कथा पंडाल “जय श्रीराम” के जयकारों और बधाइयों से गूंज उठा।

इसके पश्चात उन्होंने श्रृंगी ऋषि द्वारा अयोध्या के राजा दशरथ के लिए संपन्न कराए गए पुत्रेष्ठि यज्ञ का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि राजा दशरथ संतान प्राप्ति के लिए चिंतित थे, तब महर्षि वशिष्ठ के निर्देश पर श्रृंगी ऋषि को आमंत्रित कर पुत्रेष्ठि यज्ञ कराया गया। इस यज्ञ के फलस्वरूप भगवान श्रीराम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के रूप में चार दिव्य पुत्रों का अवतरण हुआ। जैसे ही कथा में भगवान श्रीराम के जन्म का प्रसंग आया, पूरा कथा पंडाल “जय श्रीराम” के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने खड़े होकर भगवान के अवतरण का स्वागत किया और मंगल गीतों के साथ एक-दूसरे को बधाइयाँ दीं। पूरा वातावरण भक्ति और उल्लास से भर गया।

कथा व्यास भरत उपाध्याय ने कहा कि भगवान श्रीराम का जन्म केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि मर्यादा, सत्य और आदर्श जीवन का संदेश है। यदि मनुष्य श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में उतार ले, तो परिवार और समाज दोनों में सुख, शांति और सद्भाव स्थापित हो सकता है।

इस अवसर पर श्री हनुमंत धाम, लंगड़े की चौकी के महंत गोपी गुरु जी ने कहा कि श्रीराम कथा मनुष्य के जीवन को संस्कारों से जोड़ने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन त्याग, कर्तव्य और मर्यादा का सर्वाेच्च उदाहरण है। रामकथा के माध्यम से समाज को नैतिकता और सद्भाव का संदेश मिलता है, जो आज के समय में अत्यंत आवश्यक है। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर भावपूर्वक रामकथा का श्रवण कर रहे हैं और पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है।

आयोजन समिति ने अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से कथा श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ लेने का आह्वान किया। अंत में आरती समाज सेवी पुष्कल गुप्ता ने की। साथ में डॉ दिपेश उपाध्याय, सतीश भारद्वाज, आईएमए के अध्यक्ष हरेंद्र गुप्ता, आयोजक लालू जादौन, अंजना शर्मा, गोविंद शर्मा, विष्णु सोलंकी, कृष्ण सोलंकी, अमर कुशवाह, मारुति उपाध्याय आदि उपस्थित रहे।

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