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चित्रकूट में रमि रहे रहिमन अवध नरेश जा पर विपदा पड़त है सो आवत यहि देश : श्री रामस्वरूपाचार्य जी महाराज ने किया भरत चरित्र और सुमेरू पर्वत की कथा का मार्मिक वर्णन

Pragya News 24

Thu, Mar 19, 2026
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आगरा। रामकथा कामधेनु, कल्पवृक्ष, कामदगिरि और मंदाकिनी और हमारा चित्त चित्रकूट है। रामकथा स्नेह वन की तरह है जहां हर कोई सिर्फ रामभक्त है। व्यासपीठ पर विराजमान चित्रकूट के स्वामी श्री रामस्वरूपाचार्य जी महाराज ने आज श्रीराम कथा में शिवजी द्वारा श्रीराम को सुमेरू पर्वत की कथा के वर्णन के प्रसंग के माद्यम से बताया कि कामदगिरि सुमेरू पर्वत का मस्तक, गोवर्धन (गिरिराज महाराज) सुमेरू की पुच्छ और कैलाश पर्वत मध्य भाग है। कैलाश पर जहां शिवजी तपस्या कर रहे हैं। अमावस्या को कामदगिरि की और पूर्णिमा को गोवर्धन की परिक्रमा का विशेष महत्व।

चित्रकूट धाम बने कथा स्थल पीएस गार्डन में आयोजित श्रीराम कथा में व्यास पीठ पर विराजमान श्री कामदगिरि पीठाधीश्वर श्रीमद् जगतगुरु राम नंदाचार्य स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज ने आज कहा कि श्रीरामावतार में इंद्र का अभिमान चित्रकूट में कामदगिरि पर और कृष्णावतार में गिरिराज पर्वत पर इंद्र का अभिमान भंग किया। कामदगिरि में श्रीराम ने सीता जी संग 99 रास किए। जिस तरह श्रीकृष्ण ने वृन्दावन में रास किए वैसे ही श्रीराम ने चित्रकूट में रास किए। कामदगिरि के चार प्रवेश द्वार हैं। एक द्वारा से सियाराम ने, दूसरे द्वारा से नारायण-लक्ष्मी, तीसरे द्वार से शिव-पार्वती और चौथे द्वार से ब्रह्मा-ब्रह्माणी ने प्रवेश किया। 100वां रास महारास होना था, जिस पर जयन्त ने व्यवधान पैदा किया। उन्होंने सेमूरी पर्वत के नारायण के सुदर्शन से खंडित होने की कथा का विस्तार से वर्णन किया।

इस अवसर पर मुख्य रूप से जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी श्री अनंता नंद जी सरस्वती जी, विधायक भगवान सिंह कुशवाह खेरागढ़, रामावतार त्यागी, गौरीशंकर, डॉ.अजय गुप्ता, रवि चौधरी, राजवीर चौधरी, रविकांत त्यागी आयोजन समिति के अध्यक्ष राम सेवक शर्मा (जय भोले) व महामंत्री धर्मेन्द्र त्यागी, मुख्य यजमान सिलेंद्र विथरिया, हाकिम सिंह त्यागी, रणवीर सोलंकी, पं. किशोर लवानिया, दीनदयाल मित्तल, ऋषि उपाध्याय जी, डॉ. उदिता त्यागी गाजियाबाद, श्रीनिवास विथरिया जी, राजू शर्मा सुशील बत्रा, पप्पू, विष्णु बिहारी त्यागी, अशोक मित्तल, हाकिम सिंह त्यागी, आचार्य राहुल, ऋषि उपाध्याय, रामवीर सिंह चाहर, अशोक फौजदार, रामवीर सिंह, अशोक फौजदार महावीर त्यागी, रनवीर सोलंकी, सौरभ शर्मा, सतेंद्र पराशर, जितेंद्र प्रधान, राजेंद्र बरुआ, भगवान दास, राकेश मंगल, रविन्द्र सिंह, मुरारी लाल त्यागी, सोम मित्तल, किशन यादव, ऋषि वित्तरिया, सोम मित्तल, डॉ. अनिल शर्मा आदि उपस्थित थे।

भरत चरित्र से भावुकता में संतुलन बनाए रखने की शिक्षा ले युवा पीढ़ी
श्रीराम के वन गमन की कथा का वर्णन करते हुए बताया कि श्रीराम के अयोध्या छोड़ने पर किस तरह घर-घर मसान और लोग भूत की तरह हो गए थे। अयोध्या उदासीनता के अन्धकार में डूब गई। निष्कपट प्रयास हमेशा सफल होते हैं। भरत के प्रयास में निष्कपटता थी। अयोध्या का राजपाठ श्रीराम का है। श्रीराम की भोग्या भरत की पूज्या है। भरत का ऋषि वशिष्ठ से कहा यह कथन उनके उत्कृष्ठ चरित्र का प्रमाण है। आज की युवा पीढ़ी को भरत चरित्र से प्रतिकूल वातावरण में संतुलन को बनाए रखने की शिक्षा लेनी चाहिए। भावुकता अच्छी बात है परन्तु भावुकता में संतुलन नहीं बिगाड़ना चाहिए। अपने से बड़ों का सम्मान और अपनी मर्यादा को जो जानता है वही मनुष्य अन्यथा पशु है। पशुओं में मर्यादा नहीं होती

संतों को व्यवस्थित और बंधन मुक्त होना चाहिए
साधु संतों को व्यवस्थित परन्तु बंधन मुक्त होना चाहिए। किसी प्रोटोकॉल में नहीं रहना चाहिए। संत वो है जो हर भक्त के लिए सुलभ हो। श्रीराम इसीलिए राजपाठ छोड़कर वन को गए। जहां वह सभी भक्तों और साधु संतों के लिए बना रोकटोक वह सुलभ थे। आजकल महात्मा चातुर्यमास शहरों में और पूंजीवादियों के बीच करते हैं। चातुर्मास किसी पवित्र सरोवर, तीर्थ या मठ-मंदिर में होना चाहिए। होटलों में राजसी व्यवस्था के साथ चातुर्यमास नहीं होता।

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