Tue 09 Jun 2026
Breaking News Exclusive
बरसाना धाम में सजा दिव्य फूल बंगला, राधारानी जी की पोशाक सेवा, संत सेवा एवं विशाल प्रसादी में उमड़ा श्रद्धा का सागर 251 महिलाओं की भव्य कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का शुभारंभ धाकरान चौराहे से श्री प्रेमनिधि जी मंदिर तक पालकी में पहुंचे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का हुआ भावपूर्ण समापन, सुदामा चरित्र सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु तृतीय आगरा साहित्य समारोह-2026 में गूंजी काव्य रसधारा, 'गुर्गा मुर्गा लालित मोर' का हुआ विमोचन" शपथ ग्रहण समारोह में व्यापारियों ने लिया संगठन सशक्त बनाने का संकल्प आगरा व्यापार मंडल कार्यालय का हुआ शुभारंभ, व्यापारिक समस्याओं के समाधान का बनेगा केंद्र श्रीमथुराधीश जी मंदिर में मना कुनवाड़ा उत्सव, मिट्टी के पात्रों में लगा भोग, पुरुषोत्तम मास में हुआ कुनवाड़ा महोत्सव टीबी उन्मूलन में आगरा ने राष्ट्रीय लक्ष्य को किया पार अधिकमास मनोरथ उत्सव में 21वें दिन हुआ विशेष अभिषेक, श्रृंगार और फूल बंगला मनोरथ

सूचना

Pragya News 24 is News Blog to Providing all over News of World.

राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम : टीबी उन्मूलन में आगरा ने राष्ट्रीय लक्ष्य को किया पार

Pragya News 24

Sat, Jun 6, 2026
Post views : 18

• 100 दिवसीय अभियान से आगरा ने हासिल की ऐतिहासिक 101% उपलब्धि
• 98% उपचार सफलता दर के साथ जनपद बना मिसाल

आगरा । राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत 24 मार्च से संचालित हो रहे ‘100 दिवसीय विशेष टीबी खोज अभियान’ में आगरा ने राष्ट्रीय लक्ष्य को पार करते हुए 101 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की है।

वहीं दूसरी ओर जनवरी 2026 से अब तक स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने 12,361 टीबी मरीजों की पहचान कर उन्हें तत्काल उपचार से जोड़ने में सफलता प्राप्त की है साथ ही जनवरी से मई 2026 के दौरान आगरा में 98 प्रतिशित ट्रीटमेंट सक्सेस रेट रहा है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि मरीजों की केवल पहचान ही नहीं की जा रही, बल्कि उन्हें सफलतापूर्वक पूर्ण उपचार भी उपलब्ध कराया जा रहा है। यह उपलब्धि स्वास्थ्य विभाग की मजबूत रणनीति, फील्ड स्तर पर कार्यरत टीमों की सतत मेहनत तथा बढ़ती जन-जागरूकता का परिणाम मानी जा रही है।

अभियान के तहत खामोश बीमारी की हो रही पहचान
100 दिवसीय विशेष टीबी खोज अभियान के माध्यम से ऐसे व्यक्तियों तक भी जांच सेवाएं पहुंच रही हैं, जिनमें टीबी के स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। प्रारंभिक अवस्था में रोग की पहचान होने से उपचार शीघ्र शुरू किया जा रहा है, जिससे गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं और संक्रमण के प्रसार की संभावना को कम करने में मदद मिल रही है।

अभियान के अंतर्गत अब तक 81,151 संदिग्ध व्यक्तियों का डिजिटल एक्स-रे कराया गया। इनमें टीबी के संकेत मिलने पर 20,440 लोगों की सीबी-नाट (CB-NAAT) जांच की गई, जिसमें 5,385 नए टीबी मरीजों की पुष्टि हुई। इनमें 944 ऐसे मरीज भी शामिल हैं, जिनमें कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं दे रहे थे।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार यह अभियान विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण साबित हो रहा है क्योंकि इसके माध्यम से ऐसे “साइलेंट टीबी मरीजों” की पहचान संभव हुई है, जिन्हें स्वयं भी अपने संक्रमित होने की जानकारी नहीं थी।

संवेदनशील क्षेत्रों में लगाए विशेष स्वास्थ्य शिविर
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुखेश गुप्ता के अनुसार, केंद्रीय टीबी डिविजन द्वारा चिन्हित संवेदनशील एवं उच्च जोखिम वाले गांवों में कुल 239 विशेष स्वास्थ्य शिविर प्रस्तावित किए गए थे, जिनमें से अब तक 197 शिविर सफलतापूर्वक आयोजित किए जा चुके हैं। इन शिविरों में निःशुल्क जांच, डिजिटल एक्स-रे, सैंपल परीक्षण तथा तत्काल उपचार सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। डीटीओ ने बताया कि वर्तमान में जनपद में लगभग 10,944 टीबी मरीज उपचाराधीन हैं, जिन्हें नियमित दवा के साथ निक्षय पोषण योजना के अंतर्गत पोषण एवं वित्तीय सहायता भी प्रदान की जा रही है।

जांच और उपचार का मजबूत नेटवर्क
टीबी की शीघ्र पहचान एवं मुफ्त उपचार सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जनपद में व्यापक नेटवर्क विकसित किया है। इसके अंतर्गत जनपद में 52 बलगम जांच केंद्र सक्रिय रूप से संचालित किए जा रहे हैं। 860 डॉट्स सेंटरों के माध्यम से मरीजों को घर के निकट दवा उपलब्ध कराई जा रही है। अधिकांश क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ता डॉट्स प्रोवाइडर के रूप में मरीजों की नियमित निगरानी एवं दवा सेवन सुनिश्चित कर रही हैं।

इसके अतिरिक्त, संक्रमण को फैलने से रोकने के उद्देश्य से टीबी मरीजों के परिवार एवं निकट संपर्क में रहने वाले लोगों में से 95 प्रतिशत को टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (TPT) उपलब्ध कराया जा चुका है।

टीला निवासी 19 वर्षीय झलक (बदला हुआ नाम) बताती हैं, "करीब एक साल से मुझे पेट संबंधी समस्याएं हो रही थीं। खाना खाने के बाद पचता नहीं था और पेट में तेज दर्द शुरू हो जाता था। सुबह ठीक से फ्रेश भी नहीं हो पाती थी। कई बार मेडिकल स्टोर से दवा लेकर खा ली, फिर भी समस्या बनी रही। प्राइवेट डॉक्टर की दवा से कुछ दिन आराम मिलता, लेकिन 1-2 दिन बाद दर्द और पाचन की दिक्कत फिर शुरू हो जाती। इसके बाद मेरी बहन मुझे टीबी यूनिट में ले गई। वहां जांच के बाद पता चला कि मुझे पेट की टीबी है, जिसे एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी कहते हैं। अब मेरा इलाज चल रहा है और डॉक्टर ने 9 महीने तक नियमित दवा खाने को कहा है। चिकित्सा की सलाह से मैं नियमित दवाई का सेवन कर रही हूं, जिससे मुझे पहले से आराम है। मुझे दवा के साथ-साथ प्रतिमाह पोषण पोटली भी मिल रही है। टीबी का इलाज संभव है और सरकारी अस्पतालों में मुफ्त में होता है। अगर लक्षण दिखें तो जांच के लिए डॉक्टर से मिलें।

अभियान की सफलता
• 12361 मरीजों को चिन्हित कर तुरंत इलाज से जोड़ा गया
• 81151 लोगों की गई स्क्रीनिंग
• 5385 में सीबीनाट जांच के जरिए हुई टीबी की पुष्टि
• 197 विशेष स्वास्थ्य शिविर किए गए आयोजित
• 52 बलगम निरीक्षण केंद्र बनाए गए जनपद में
• 860 डॉट्स केंद्रों के जरिए मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही दवा

Tags :

Agra News

Pragya News

Uttar Pradesh News

UP News

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें

विज्ञापन