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श्रीमद्भागवत कथा : मॉडर्न बनें, वेस्टर्न नहीं; जया किशोरी ने बताए सफल जीवन के सूत्र

Pragya News 24

Sat, Jul 25, 2026
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आगरा। फतेहाबाद रोड स्थित राजदेवम में श्रीश्याम परिवार सेवा ट्रस्ट द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन व्यासपीठ से कथा वाचन करते हुए पूज्य श्री जया किशोरी ने कहा कि "अपने बच्चों को मॉडर्न बनाइए, वेस्टर्न नहीं। उन्हें किताबी डिग्री के साथ भारतीय संस्कृति, संस्कार और जीवन मूल्यों का भी ज्ञान दें।" उन्होंने कहा कि आधुनिक होने का अर्थ समय के साथ आगे बढ़ना है, लेकिन अपनी संस्कृति और मूल्यों को त्याग देना नहीं।

भक्त ध्रुव और प्रह्लाद की कथा का भावपूर्ण वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान ने अपने विभिन्न अवतारों के माध्यम से समय-समय पर मानवता को जीवन जीने का मार्ग दिखाया। त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने मर्यादा और सदाचार का संदेश दिया, जबकि द्वापर में भगवान श्रीकृष्ण ने धर्म की स्थापना और जीवन की चुनौतियों का समाधान सिखाया। उन्होंने कहा कि समय के अनुरूप परिवर्तन आवश्यक है, लेकिन अपनी जड़ों और संस्कारों से जुड़ाव बना रहना चाहिए।

जया किशोरी ने अभिभावकों से आह्वान किया कि वे बच्चों, विशेषकर बेटियों को केवल उच्च शिक्षा ही नहीं, बल्कि संस्कारों से भी समृद्ध बनाएं। उन्होंने कहा कि "संस्कारों के बिना शिक्षा अधूरी है। आज परिवार टूट रहे हैं क्योंकि शिक्षा के साथ जीवन मूल्यों का संतुलन कम होता जा रहा है।" उन्होंने कहा कि ज्ञान का अर्थ संसार से विमुख होना नहीं, बल्कि जीवन के सत्य को समझना है। यदि व्यक्ति जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझ ले, तो उसकी अनेक समस्याएं स्वतः समाप्त हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि जीवन के कुछ निर्णय ईश्वर पर छोड़ देना ही सर्वोत्तम होता है। कथा के अंत में आरती के साथ श्रद्धालुओं ने भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया।

स्वार्थ नहीं, समर्पण भाव से करें सेवा
कथा के दौरान पूज्य श्री जया किशोरी ने सेवा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यदि धन से सेवा संभव न हो तो मन और तन से श्रीहरि की सेवा करें। उन्होंने कहा कि सेवा कभी भी स्वार्थ या अपेक्षा के साथ नहीं करनी चाहिए। निष्काम भाव से की गई सेवा ही ईश्वर को प्रिय होती है। भगवान कठिनाइयों को हमेशा समाप्त नहीं करते, बल्कि उन्हें सहने की शक्ति अवश्य प्रदान करते हैं।

भक्त ध्रुव के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति और अटूट विश्वास से जीवन की हर परीक्षा पार की जा सकती है। इस अवसर पर भगवान नरसिंह और भक्त प्रह्लाद की झांकी ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया और पूरा कथा पंडाल "नारायण-नारायण" के जयघोष से गूंज उठा।

भजनों से वृंदावन धाम बना कथा पंडाल
कथा से पूर्व आयोजित भजन संध्या में पूज्य श्री जया किशोरी ने अपनी मधुर वाणी से भक्तों को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। "श्रीराधे गोविंदा मन भज ले हरि का प्यारा नाम", "मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है", "किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए", "मैं तो आई वृंदावन धाम", "बांके ठाकुर की ठकुरानी, वृंदावन जिसकी राजधानी", "मारने वाला है भगवान, बचाने वाला है भगवान" और "श्रीमन नारायण-नारायण हरि-हरि" जैसे भजनों पर श्रद्धालु देर तक झूमते रहे। भक्ति और उल्लास से पूरा कथा पंडाल मानो वृंदावन और बरसाना धाम में परिवर्तित हो गया।

इस अवसर पर राजकुमार गुप्ता, राधा गुप्ता सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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