: जल संचय आगरा की सामायिक जरूरत, करेंगे मुख्यमंत्री से बात - विधायक फतेहाबाद छोटे लाल वर्मा
Pragya News 24
Tue, Jan 9, 2024
आगरा। उटंगन नदी में जहां भी संभव हो पानी को संचित किया जाये। चूंकि राजस्थान से नदी में पानी आना बंद हो चुका है, इसीलिये लोकल कैचमेंट एरिया का पानी ही व्यवस्थित संचय को अब उपलब्ध है, यह कहना है फतेहाबाद क्षेत्र के विधायक छोटे लाल वर्मा का। उन्होंने कहा कि उटंगन नदी की मौजूदा स्थिति में फतेहाबाद विकासखंड के रेहावली गांव में बांध बनाकर जलाशय के रूप में नदी के करोडों घन मीटर पानी को संग्रहित रखा जा सकता है। विधायक ने कहा कि रेहावली से उटंगन नदी पर एक पुल उन्होंने स्वीकृत करवाया है, अब जबकि जलाशय बनाये जाने की संभावना भी उनके संज्ञान में आयी है तो पुल योजना के साथ ही बांध बनाये जाने के काम को भी करवाने के प्रयास को भी सक्रिय होंगे। उन्होंने कहा कि बांध के ऊपर होकर भी पुल बनाया जा सकता है।
विधायक छोटे लाल वर्मा ने कहा कि यमुना नदी का ऊफान तो उटंगन के कई कि मी बैक मारने का सबल कारण तो है ही किन्तु उपस्ट्रीम से भी बड़ी मात्रा में पानी संचय को उपलब्ध होता है। जिसे कि रपटा या चौकडैम बनाने के स्थान पर रेग्युलेटर और सैल्यूस गेट युक्त स्ट्रक्चर बनाकर अधिक समय तक किसानों की जरूरत के अनुसार संरक्षित किया जा सकता है। वह सिविल सोसायटी ऑफ आगरा के प्रतिनिधिमंडल के साथ अपने निवास पर हुई मुलाकात के अवसर पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि इस सबध में मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ जी और सिंचाई मंत्री श्री स्वतंत्रदेव सिंह से भी बात करेंगे और योजना की उपयोगिता उनके संज्ञान में लाये जाने का हर भरसक प्रयास करेंगे।
तथ्य पत्र दिया
विधायक वर्मा के साथ हुई इस मुलाकात में सिविल सोसायटी ऑफ आगरा के जनरल सैकेट्री अनिल शर्मा के द्वारा रेहावली बांध संबधी तथ्य पत्र भी भेंट किया गया। उन्होंने कहा कि अगर उटंगन में बांध बन सका तो टूरिस्ट आकर्षण का केन्द्र होगा। फतेहाबाद रोड टूरिस्ट कांप्लैक्स लखनऊ आगरा एक्सप्रेस वे से यहां तक पहुंच सहज होगी। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता श्याम सुंदर शर्मा भी इस अवसर पर मौजूद थे। उन्होंने कहा कि उटंगन सौ कि मी के लगभग आगरा जनपद में बहती हुई यमुना नदी में समाती है, अगर यहां बांध बन सका तो पिनहाट, बाह, फतेहाबाद विकास खंडों के अनेक गांवों का भूगर्भ जलस्तर स्वतः सुधर जायेगा साथ ही फतेहाबाद नगर को पाइप वाटर सप्लाई भी संभव हाोगा।
जल संचय आगरा की सामायिक जरूरत
भाजपा के वरिष्ठ नेता श्याम सुंदर शर्मा ने कहा कि जनपद के अधिकांश विकास खंड तेजी के साथ डार्क जोन में तब्दील हो रहे हैं, भारत सरकार से अब और अधिक गंगाजल आगरा को आवंटित किये जाने की उम्मीद नहीं है। गांवों में हैंडपंप फिर से सुचारू हो सकें, जेट पंप और सबमरसिविल पंप जयरत का पानी उपलब्ध करवाते रहें, इसके लिये जलसंरक्षण कार्यक्रम का योजनाबद्ध तरीके से जनपद में क्रियान्वित करवाना सामायिक जरूरत और भारत सरकार के जलशक्ति मंत्रालय की नीति के अनुकूल है। उन्होंने कहा कि रेहावली बांध योजना अत्यंत उपयोगी है, विधायक से अपेक्षा है कि वह इसे प्रभावी ढंग से क्रियान्वित करवायेंगे। विधायक के साथ इस मुलाकात में राजीव सक्सेना, असलम सलीमी भी थे।
उटंगन में सात कि मी तक बैक मारती है यमुना
उल्लेखनीय है कि उटंगन नदी में जलसंचय के लिये अपस्ट्रीम से आने वाले पानी से कहीं बड़ी जलराशि यमुना नदी के बैक मारने के कारण उपलब्ध होती है। जिसे कि केवल गेटिड स्ट्रैक्चर वाले डैम बनकर ही संचित किया जा सकता है। वहीं अपस्ट्रीम के खेरागढ की बंदियों और किरावली की खारी नदी और बरसाती नालों के नदी में पहुंचने वाले पानी की बडी मात्रा को जरूरत के मुताबिक थामे रखा जा सकता है। उल्लेखनीय है कि उटंगन नदी रेहावली (फतेहाबाद तहसील) और रीठे गांव (बाह तहसील) के बीच यमुना नदी में समाती है। जब भी आगरा में यमुना नदी लो फ्लड लेवल पार करती है उटंगन नदी में यमुना का पानी 6-7 कि मी तक बैक मारता है। यह विपुल जलराशि (लगभग दो अरब घन मीटर) होती है, जिसे कि गेटिड स्ट्रक्चर बनाकर पूरे साल रोका जा सकता है। रोका गया यह पानी जहां बाह तहसील गांवों के एक्यूफर रिचार्ज के लिये उपयोगी है, जरूरत पड़ने पर डिस्चार्ज कर बटेश्वर के घाटों तक ताजा पानी उपलब्ध करना संभव होगा। रेहावली से उटंगन नदी के नगला बिहारी तक पहुंचने वाली विपुल जलराशि का संचय पानी की किल्लत से जूझते आगरा जनपद के बाह और फतेहाबाद तहसील के गांवों के लिए अत्यंत उपयोगी है।
तिनपतिया - कई रोगों के उपचार में उपयोगी है उटंगन के तटीय क्षेत्र में उगने वाली तिनपतियां।
वनस्पति शास्त्र में सौर वीड, सौर ग्रास के रूप में पहचान रखने वाली इस घास का उपयोग अनेक बीमारियों को दूर करने के अलावा नशेबाजी की लत छुडवाने में भी यह उपयोगी मानी जाती है। बैद्यिक जरूरत का उत्पाद होने के कारण इसकी डिमांड पूरे साल बनी रहती है।
इसका सबसे पहला उल्लेख 1888 में आगरा के संबध में प्रकाशित एक पुस्तक में मिलता है, अब तो इस उत्पाद के बारे में इंटरनेट पर भरपूर जानकारियां हैं। आदतन नशेबाजों को उनकी आदत से छुटकारा दिलवाने में तिनपतिया का अर्क काफी उपयोगी माना जाता है।
फायदे - तिनपतिया के चांगेरी या तिनपतिया, ये घास की तरह ही एक खरपतवार है। इससे मिलने वाले फायदे चौंकाने वाले हैं। इसके औषधीय गुणों को आयुर्वेद में भी स्वीकार किया गया है। इसलिए इसे आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी का दर्जा दिया गया। स्वाद में खट्टी चांगेरी विटामिन -सी से भरपूर होती है। इसे अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग नामों से जाना जाता है। यह एक नहीं, बल्कि कई बीमारियों को दूर करने में मददगार है, जैसे पिंपल्स और काले धब्बे करे दूर ; कफ, साइनस और माइग्रेन में कारगर होती है; सांस की बदबू दूर कर दांतों-मसूड़ों के लिए सेहतमंद; पाइल्स के इलाज में मददगार; भूख बढ़ने के साथ हाजमा रहेगा दुरुस्त; ल्यूकोरिया रोग से पाएं मुक्ति; शरीर के मस्सों से मिलती है निजात; लिवर को मजबूत करने में मददगार है।
विकास की दृष्टि से फ़तेहाबाद, पिनहाट, बाह में रोजगार परक विकल्प के लिए, औषधीय गुणों से भरपूर वनस्पति आधारित खेती और आयुर्वेदिक दवा बनाने को प्रोत्साहन देना जरूरी है।
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