: विषधर कालिया नाग का श्रीकृष्ण ने किया मान मर्दन, फन पर बंशी बजाते देख श्रद्धालु हुए आनंदित
Tue, Nov 21, 2023
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श्रीकृष्ण लीला शताब्दी समारोह में हुई कालीदह लीला, डांडिया रास देख भक्त हुए मंत्रमुग्ध
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बुधवार को हाेगा गोमय श्रंगार एवं गोवर्धन पूजा संग अन्नकूट प्रसादी का आयोजन
आगरा। न कोई जान सका, न कोई पार पा सका, हर लीला के पीछे छुपे महत्व को श्रीकृष्ण का कोई न कोई गूढ़ रहस्य छुपा। जिस नाग के नाम से संसार होता था भयभीत उसी का मान मर्दन कर कान्हा ने धर्म को दिलाई थी जीत। इसी संदेश को जन− जन तक पहुंचाते हुए श्रीकृष्ण लीला समिति के अन्तर्गत श्रीकृष्ण लीला शताब्दी समारोह के पांचवे दिन कालिदह लीला एवं डांडिया रास नृत्य का मंचन हुआ। लीला मंचन के कलाकारों के सशक्त अभिनय देख श्रद्धालु भाव विभाेर हो उठे।
वाटरवर्क्स चौराहा स्थित गौशाला में चल रही श्रीकृष्ण लीला में काली दह लीला मंचन से पूर्व मुख्य अतिथि समाज सेवी सुनील विकल और गजेंद्र शर्मा ने स्वरूपों की आरती उतारी। सभी का स्वागत समिति के अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने किया।
लीला मंचन पर खेलन आयौ री, मेरौ बारो सौ कन्हैया भजन की जैसे ही गूंज उठी दर्शकदीर्घा में जय जय श्री राधे के जयघाेष लगने लगे। उधर मैया यशाेदा का अपने लाला के लिए किया गया रुदन हर किसी के नेत्रों को सजल कर रहा था।
राधा विनोद लीला संस्थान, वृंदावन के लीला निर्देशक स्वामी श्रीराम शर्मा (निमाई) के निर्देशन में कलाकारों ने प्रभावशाली मंचन किया। लीला मंचन में दिखाया गया कि भगवान श्रीकृष्ण यमुना तट पर ग्वालों के साथ गेंद खेल रहे हैं। खेलते-खेलते गेंद यमुना में चली जाती है। अब उसे गेंद लेने के लिए कौन जाए, इस पर बहस होती है। क्योंकि उसमें कालिया नाग रहता था। अंत में कान्हा ही यमुना में गेंद लेने कूद गए। काफी देर तक श्रीकृष्ण यमुना से नहीं निकले तो उनके सखाओं को चिंता हुई। थोड़ी देर में ब्रजवासी यमुना के तट पर एकत्र हो गए। माता यशोदा को पता चला तो वे रोती बिलखती हुई तट पर आईं। उनके रुदन को सुन कर सभी दर्शकों की आंखें अश्रु से भीग गईं। कुछ देर बाद कान्हा कालिया नाग के फन पर नृत्य करते हुए निकल आए। जिसे सभी में खुशी की लहर दौड़ गई।
लीला मंचन में इसके अलावा वत्सासुर वध, वकासुर वध, अधासुर वध, धेनकासुर वध की लीलाओं का मंचन भी किया गया। पांचवे दिन के लीला मंचन समापन पर समिति के विजय रोहतगी, संजय गर्ग, अशोक गोयल, पार्षद मुरारी लाल गोयल, शेखर गोयल, कृष्ण कन्हैया अग्रवाल, बृजेश अग्रवाल, प्रभात रोहतगी, गिर्राज बंसल, बीजी अग्रवाल, संजीव गुप्ता, संजय, विष्णु अग्रवाल, मीडिया प्रभारी तनु गुप्ता आदि ने स्वरूपों की आरती उतारी।
: आगरा की धर्मनगरी छीपीटोला में हुआ भव्य पिच्छिका परिवर्तन समारोह
Tue, Nov 21, 2023
आगरा। पार्श्वधाम, छिपीटोला आगरा में विराजमान आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के परम् प्रिय शिष्य परम पूज्य मुनि श्री 108 साक्ष्य सागर जी महाराज, मुनि श्री 108 योग्य सागर जी महाराज,मुनि श्री 108 निवृत सागर जी महाराज जी संसघ के सानिध्य में भव्य पिच्छिका परिवर्तन समारोह बड़ी धूमधाम से मनाया गया स इस मौके पर श्रावक श्राविकाओं ने पिच्छिका की शोभायात्रा निकाली और भक्ति संगीत पर जमकर नृत्य किया। पिच्छिका को बडे़ आकर्षण ढंग से सजाया गया और उसको गाजे बाजों के साथ कार्यक्रम स्थल तक लाया गया। मंच संचालन सतेंद्र जैन साहूला ने किया।
सबसे पहले दीप प्रज्जवलन और महिला मंडल द्वारा सुन्दर मंगलाचरण किया गया। मुनि श्री का पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट और पुरुष और महिलाओ ने किया और मुनिश्री के संघ का मंच पर आगमन हुआ समूचा परिसर उनके जयकारों से गुंजायमान हो उठा। इस दौरान श्रावकों ने जैन मुनि को नवीन पिच्छिका भेट की और आयोजन स्थल जयकारों से गूंज उठा।
पुरानी पीछी श्री निवृत्त सागर जी महाराज जी की प्रवीन, पियूष, पद्मावती ज्वेलर्स परिवार, श्री योग्य सागर जी महाराज जी की नितिन जैन परिवार, श्री साक्ष्य सागर महाराज जी की दीपक, भावना, ईदगाह ने प्राप्त की।
मुनि श्री 108 साक्ष्य सागर जी महाराज ने बताया कि दिगंबर जैन साधु के पास तीन उपकरण के अलावा और कुछ भी नहीं होता। पिच्छिका, कमंडल और शास्त्र। इन तीन उपकरणों के माध्यम से ही वे अपनी जीवन भर साधना करते रहते हैं। संयमोपकरण जिसे पिच्छिका कहते हैं, यह पिच्छिका मोर पंखों से निर्मित होती है, मोर स्वतरू ही इन पंखों को वर्ष में तीन बार छोड़ते हैं उन्हीं छोड़े हुए पंखों को इकट्ठा करके श्रावकगण पिच्छिका का निर्माण करते हैं। पिच्छिका के माध्यम से मुनिराज अपने संयम का पालन करते हैं जब कहीं यह उठते हैं, बैठते हैं तब उस समय जमीन एवं शरीर का पिच्छिका के माध्यम से परिमार्जन कर लेते हैं, ताकि जो आंखों से दिखाई नहीं देते ऐसे जीवों का घात न हो सके। यह पिच्छिका उस समय भी उपयोग करते हैं जब शास्त्र या कमंडल को रखना या उठाना हो। जहां शास्त्र या कमंडल रखना हो वहां पर जमीन पर सूक्ष्म जीव रहते हैं जिन्हें हम आखों से नहीं देख सकते, तो पिच्छिका से उन जीवों का परिमार्जन कर दिया जाता है, ताकि उन्हें किसी प्रकार का कष्ट न पहुंचे। यह पिच्छिका इतनी मृदु होती है कि इसके पंख आंख के ऊपर स्पर्श किए जाएं तो वह आंखों में नहीं चुभते और जब इन पंखों में लगभग एक साल के भीतर यह मृदुता कम होने लगती है तो इस पिच्छिका को बदल लिया जाता है। इस कार्यक्रम को पिच्छिका परिवर्तन के नाम से जाना जाता है ।
मुनिश्री की पुरानी पीछी ग्रहण करते जैन समाज के सेवकगण
इस मौके पर मंदिर कमेटी अध्यक्ष अनिल जैन कांटा, मंत्री प्रवेश जैन, रविंद्र जैन (कोषाध्यक्ष), प्रदीप जैन सी.ए, राजेश जैन, रोहित जैन, चक्रेश जैन, विवेक जैन, आशु जैन (बाबा), मुन्ना लाल, सतीश चंद्र, सतेंद्र साहुला, मुरारी लाल जैन, पवन जैन, दिनेश जैन, राजीव जैन, प्रवीन जैन (नेताजी), दीपक जैन, नितिन जैन, विराग चौन, सौरभ जैन, राहुल जैन (वासु), मनोज जैन, अखलेश, पवन, राजीव, आदिश, मीडिया प्रभारी राहुल जैन एवं सकल जैन समाज सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
: विशाल श्री श्याम संकीर्तन महोत्सव का हुआ आयोजन
Tue, Nov 21, 2023
सजा दो घर को गुलशन सा मेरे सरकार आये हैं… जब से मैं श्याम तेरी चौखट पर आ रहा हूँ बिन माँगे सब पा रहा हूँ…
आगरा। सोमवार को श्री श्याम प्रभू सखा मित्र मंडल समिति आगरा द्वारा 13वाँ विशाल श्री श्याम संकीर्तन महोत्सव का आयोजन कमला नगर स्थित जनक पार्क में किया गया। महोत्सव का शुभारम्भ मण्डल के सभी सदस्यों के द्वारा श्री श्याम प्रभू खाटू वालों की अखड ज्योति प्रज्वलित कर किया गया। भजन संध्या शुभारम्भ दीप दीक्षित द्वारा गणेश वंदना, मुकेश जैन द्वारा हनुमान वंदना कर उनका आव्हान किया गया।
श्री श्याम संकीर्तन महोत्सव के आयोजन में झूमते श्री श्याम प्रभू सखा मित्र मण्डल के पाधिकारीगण
मुरादाबाद से आयी शिल्पी कौशिक ने अपने भजनों की प्रस्तुति से श्याम प्रेमियों को रिझाया। कलकत्ता से पधारे सुप्रसिद्ध गायक राजू पारिक ने अपने भजनों पर भक्तों को झूमने पर मजबूर कर दिया। राजस्थान के दौसा से पधारे गायक अजय शर्मा के भजनों को सुनकर सभी श्याम प्रेमी मंत्रमुग्ध हो गये।
महोत्सव में श्याम प्रभू के छप्पन भोग, भव्य दरबार, आलोकिक श्रृंगार, अखड ज्योति, मधुर संकीर्तन, श्याम रसोई का लाभ श्याम प्रेमियों को प्राप्त हुआ। महोत्सव में आये सभी सम्मानित व्यक्तियों का स्वागत मडल के स्वागत अध्यक्ष अविनाश राणा तथा सदस्यों के द्वारा किया गया। महोत्सव का समापन श्री श्याम प्रभू की आरती कर किया गया।
इन्होंने संभाली व्यवस्थाएं
महोत्सव की व्यवस्था में मुख्य रुप से हरिओमबाबा, वंशी वर्मा, ओमप्रकाश शर्मा अरविन्द वर्मा, प्रवीन गोयल, अविनाश राणा, किशन अग्रवाल, पंकज लोहिया, गोपाल कृष्ण, राजीव वर्मा, उमा शंकर, अजय कुमार, पवन मित्तल, गजेन्द्र वर्मा, सोनू मित्तल, धर्मेन्द्र यादव, राजन गुप्ता, जयपाल सिंह, तेज मोहन राठौर, अशोक तिवारी आदि मुख्य रुप से उपस्थित रहे।