Tue 22 Sep 2026
Breaking News Exclusive
अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन का शपथ ग्रहण समारोह 23 सितंबर को केंद्रीय विद्यालय-2 में विश्व पर्यटन दिवस पर दिखी भारत की सांस्कृतिक विविधता जनकपुरी केंद्रीय कार्यालय में जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ मंजू भदौरिया ने की महाआरती कारोबार, तकनीक और वैश्विक साझेदारी के नए द्वार खोलेगा ‘मीट एट आगरा’ यूजीसी के विरोध में आगरा में तेज हुआ आंदोलन, ट्रैक्टर मार्च को लेकर बढ़ी हलचल जरूरतमंदों के लिए शुरू हुई एक रुपये में भरपेट भोजन की सेवा दान की राशि से जनसेवा का संकल्प, बालिका कॉलेज के दो कक्षों का जीर्णोद्धार वनवासी कल्याण आश्रम की 37 बालिकाओं ने लायंस क्लब प्रयास के साथ देखी हनुमान अंश, उत्साह से लिया आउटिंग का आनंद संत शिरोमणि दुर्बलनाथ के 165वें जन्मोत्सव पर निकलेगी भव्य शोभायात्रा जनकपुरी महोत्सव की तैयारियां तेज, 1 से 10 अक्टूबर तक होंगे भव्य आयोजन

सूचना

Pragya News 24 is News Blog to Providing all over News of World.

: यह समाज नहीं जलाता रावण का पुतला, बल्कि करता है दशानन की पूजा

Pragya News 24

Tue, Oct 24, 2023
Post views : 128

आगरा। रावण को बुराई का प्रतीक माना जाता है। इसलिए उसके पुतले का दहन किया जाता है लेकिन आगरा में एक ऐसी भी समाज है जो रावण को पूजता है। इस समाज के लोगों ने समाज से अपील की है कि वह दशानन के आदर्शों को आत्मसात कर अपने मन के अंदर छिपे अंधकार और लोभ, लालच रूपी रावण को मारें। प्रकांड पंडित और परम शिव भक्त का दहन ना करें। इसके लिए उन्होंने मंचन भी किया और शिव स्तुति भी की।

लंकापति दशानन महाराज पूजा समिति और सारस्वत समाज द्वारा विजयदशमी पर्व के अवसर पर शिव तांडव स्त्रोत का पाठ किया गया। समिति के पदाधिकारी ने बताया कि भगवान विष्णु की हर लीला पूर्व विदित होती थी। लोगों में संदेश देने के लिए राम लीला का इस धरा पर मंचन हुआ। जब भगवान राम ने सारस्वत ब्राह्मण रावण को महाज्ञानी बताते हुए लक्ष्मण को उन्हें गुरु बना कर ज्ञान लेने के लिए भेजा और महप्रतापी रावण ने माता सीता को इतने दिन लंका में रखने के बाद भी कभी उनके चरणों से ऊपर नजर नहीं उठाई। उन्होंने सीता माता का हरण अपनी बहन के अपमान का बदला लेने के लिए भाई का धर्म निभाने के लिए किया था।

उन्होंने बताया कि रावण ऐसे महान ज्ञानी थे जिन्होंने खुद का नाम तो अमर किया ही साथ ही अपने एक लाख पुत्रों और सवा लाख नातियों को साक्षात विष्णु भगवान विष्णु, शेषनाग और रुद्रावतार बजरंगबली समेत तमाम देवों और राम की सेना बनी संत आत्माओं के हाथों बैकुंठ सागर पार करवा दिया। ऐसे महाप्रतापी की पूजा होनी चाहिए और उनके जीवन से सीख लेनी चाहिए। पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने और एक महान ब्राह्मण का अपमान करने से बचने के लिए रावण दहन का बहिष्कार करना चाहिए।

Tags :

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें

विज्ञापन