: मां भगवती की साधना जीवन को देती है ऊर्जा : बाल योगी पचौरी जी महाराज
Pragya News 24
Sat, Sep 30, 2023
आगरा: श्री महालक्ष्मी मन्दिर बल्केश्वर आगरा में चल रही श्रीमद देवी भागवत के नवम दिवस में व्यास पीठ से प्रवचन करते हुए श्री बाल योगी पचौरी जी महाराज ने कहा कि आदि शक्ति महामाया की उत्पत्ति नही होती है क्योंकि वह अनादि है। वह परा प्रकृति स्वरुपा देवी सर्व कारणो की भी कारण है। उनकी शक्ति सभी प्राणियों मे रहती है। मात्र शक्ति से रहित हो जाने पर जीव शव तुल्य हो जाता है।
देवताओं की कार्यसिद्धि के लिये ही उनका प्रागट्य और तिरोधान होता है। उस महामाया ने बह्मा की सरस्वती, विष्णुजी को महालक्ष्मी, शंकर जी को गिरिजा शक्ति देकर शक्तिशाली बनाया है अतः तीनो देवा उनकी सेवा करते हैं।
बाल योगी पचौरी जी ने कहा त्वष्टा का पुत्र विश्वरूपा का नाम त्रिशिरा भी है। उनके तीन सिर थे वह अपने तीनो मुखो से भिन्न-2 कार्य एक साथ करते थे। एक मुख से वेद पाठ, दूसरे मुख से मधपान, तीसरे मुख से सब दिशाओ को एक साथ देखना। जब इन्द्र ने छल से त्रिशिरा विश्वरूपा का सिर कटवा दिया तो तीनो मुखों से हजारो पक्षी एक साथ निकले। प्रथम मुख से तीतर जो वेदाध्ययन करते थे। दूसरे मुख से गौरैया जो मधपान करते थे। तीसरे मुख से कपिज्जल वैया पक्षी जो चारो दिशाओं को देखने वाला है।
माँ भगवती की साधना करने से मनुष्य को अपने जीवन की सभी खुशियां वापस मिलती है तथा मनुष्य ऊर्जावान होकर जीवन में संचार करता है।
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