: राम सीय सुंदर प्रतिछाहीं, जगमगात मनि खंभन माहीं। मनहुं मदन रति धरि बहु रूपा, देखत राम बिआहु अनूपा।।
Pragya News 24
Tue, Jan 23, 2024
- अयोध्या धाम बने कर्मयोगी एनक्लेव में हो रही है वर्षा श्रीराम की पावन कथा की
- श्री राम कथा प्रसंग के चतुर्थ दिवस हुआ सीता स्वयंवर, परशुराम संवाद, गूंजे बधाई के गीत
आगरा। जय जय गिरिराज किसोरी, जय महेश मुख चंद्र चकोरी… अयोध्या धाम बने कर्मयोगी एनक्लेव, कमला नगर स्थित श्री कर्मयोगेश्वर मंदिर में जब सीता स्वयंवर का शंखनाद हुआ तो हर भक्त का हृदय मानो उत्साह से आह्लादित हो उठा।
अयोध्या धाम में श्री राम लला प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में कर्मयोगी एनक्लेव, सोसायटी के संयोजन में सीताराम परिवार द्वारा आयोजित श्री राम कथा में चतुर्थ दिवस सीता स्वयंवर और परशुराम संवाद प्रसंग हुए। मुख्य अतिथि विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, मुख्य यजमान जीतू और रिचा अग्रवाल, गिर्राज बंसल ने श्री राम चरित मानस की आरती उतारी।

कथा व्यास भरत उपाध्याय ने सीता स्वयंवर लक्ष्मण परशुराम संवाद और माता जानकी को मिथिलावासियों द्वारा दी गई विदाई का हृदयस्पर्शी वर्णन किया गया। कथा व्यास ने अपनी अमृतवाणी से उपस्थित श्रद्धालुओं को निहाल करते हुए कहा कि अहिल्या उद्धार के बार गुरु विश्वामित्र राजा जनक निमंत्रण पर जनकपुरी पहुंचे। उनके साथ श्रीराम और लक्ष्मण भी थे।
कथा व्यास भरत उपाध्या ने मिथिलानगरी के सौंदर्य का बहुत ही सुंदर वर्णन किया। कहा कि मिथिला नगरी जहां स्वयं माता महालक्ष्मी ने अवतरण लिया वहां का वैभव शब्दों में नहीं कहा जा सकता। मिथिला नगरी में सर्वत्र खुशियां ही खुशियां और आनंद ही आनंद था। वहां धन-धान्य सुख एश्वर्य की कमी कल्पना में भी संभव नहीं है। तीनों लोकों की सुंदरता से सुंदर मिथिला नगरी की सुंदरता से हर हृदय भाव विभोर हो रहा था। उधर राजा जनक द्वारा सीता स्वयंवर की कठिन शर्त रख दी गयी। जिसके अन्तर्गत सीता का ब्याह उसी के साथ होगा जो भगवान शंकर के धनुष को भंग करने सामर्थ्य रखता होगा।
इधर सखियों के साथ सीता जी पुष्प वाटिका में जाती हैं और पुष्प लेकर माता गौरी की पूजा करती हैं। इसी मध्य श्री राम और सीता जी परस्पर एक दूसरे को देखकर मोहित हो जाती हैं। यह राम रूप में भगवान विष्णु और जगत जननी जानकी के रूप में साक्षात लक्ष्मी जी की लीला है। प्रीत गहरी होती है और सीता जी को मन ही मन श्रीराम को अपनी पति वरण करती हैं किंतु मन में संशय कि धनुष भंग भी होना आवश्यक है। सीता जी की चिंता दूर होती है भरी सभा में दिग्विजय राजाओं की उपस्थिति में श्रीराम भगवान शंकर का धनुष भंग करते हैं।
लंगड़े की चौकी, हनुमान मंदिर के महंत गोपी गुरु ने कहा कि माता सीता ने माता गौरी की आराधना की थी और मनचाहा वर प्राप्त किया। जहां आस्था होती है वहां कामना अवश्य पूरी होती है। कथा में कथा व्यास द्वारा श्री राम द्वारा माता जानकी का वरण और जमदग्नि पुत्र परशुराम तथा लक्ष्मण के मध्य वाद विवाद के बाद दिव्य विवाह और भव्य विदाई का भी मनोहारी वर्णन किया गया।
इस अवसर पर पार्षद कंचन बंसल, मंदिर सचिव ओम प्रकाश, गिर्राज बंसल, शिवानी अग्रवाल, संजय गुप्ता, विजय रोहतगी, प्रभात रोहतगी, पवन बंसल, विजय अग्रवाल, अंकित बंसल, हरीश गोयल, भानु मंगलानी, संजय अग्रवाल, आशु रोहतगी, बीएस शर्मा आदि उपस्थित रहे। जीतू अग्रवाल ने बताया कि बुधवार को कथा प्रसंग के बाद श्री कृष्ण रास लीला का मंचन और रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत होंगे।
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