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: श्रीराम कथा में राम व लक्ष्मण के ऋषि विश्वामित्र के साथ वन जाने की कथा सुन भाव विभोर हुए भक्त

Pragya News 24

Sat, Sep 23, 2023
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आगरा। श्याम, गौर सुन्दर दोउ भाई, विश्वामित्र महानिधि पाई…। श्याम रूपी श्रीराम और गोरे लक्ष्मण के रूप में विश्वामित्र ने मानो महाधन प्राप्त कर लिया। ब्रह्म स्वरूप इस धन को प्राप्त करने के लिए विश्वामित्र को अपने सम्मान को अलग करना पड़ा। विश्वासमित्र महामुनि ज्ञानी… और मुनि आगमन सुना जब राजा, मिलन गयउ तब बिप्र समाजा… जैसे दोहे, छंद और सोरठे के माध्यम से श्री कामदगिरि पीठाधीश्वर श्रीमद् जगतगुरु राम नंदाचार्य स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज ने श्रीराम कथा के मर्म को समझाते हुए कहा कि विश्वासमित्र को महामुनि से मुनि बनना पड़ा, यानि भगवान को पाना हो तो अपने सम्मान को एक तरफ रख दो। तभी ईश्वर की प्राप्ति होगी।

चित्रकूट धाम के रूप में सजे कोठी मीनाजार में श्रीकामतानाथ सेवा समिति द्वारा आयोजित श्रीराम कथा में आज स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज ने श्रीराम व लक्ष्मण को विश्वामित्र के साथ राक्षकों के वध और परमार्थ के लिए वन जाने की कथा का वर्णन किया। ऋषि वशिष्ठ के 100 पुत्रों को क्रोधाग्नि से मारने के कारण विश्वामित्र और ऋषि वशिष्ठ के बीच का विरोध श्रीराम के अयोध्या आने पर ही समाप्त हुआ। कहा कि किसी को मिटाना या मारना विशेषता नहीं बल्कि बनाना विशेषता है। मारने से कलंक और बनाने से यश की प्राप्ति होती है। संतों में विरोध होगा तो न श्रीराम आएंगे न ही राम राज्य। सभी के आपस का विरोध समाप्त होना चाहिए। श्रीराम के नाम में अपार शक्ति है, जो सिर्फ करूणा और कृपा बरसाती है। जिसके जीवन में कृपा करने का स्वभाव और करुणा हो वही संत है।

प्रातः काल उठ के रघुनाथा, मात-पिता गुरु नावम माथा…

श्रीराम कथा के माध्यम से सामाजिक विषयों पर चर्चा करते हुए भक्तों से स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज ने कहा कि माता-पिता और संतों के आर्शीवाद से शक्ति प्राप्त होती है। अपने बच्चों में ब्रह्म मुहूर्त में उठने के संस्कार डालें। परन्तु आजकल के माता तो बच्चों से भी देर से उठते हैं। मां सरस्वती की कृपा प्रातः जल्दी उठने से ही होती है। गृहस्थ लोगों के जीवन की सबसे बड़ी साधना बच्चों को संस्कारवान बनाना है।

मुनि चरणन गए सुत चारी, राम देख मुनि विरति बिसारी…, सब सुत मोहि प्राण की नाई, राम देत नहीं बनहि गुसाईं… जैसे श्रीराम चरित मान की छंद और चोपाईयों के संगीतमय वर्णन से हर भक्त भक्ति में डूबा नजर या। कथा विराम के बाद आरती व सभी भक्तों को प्रसाद वितरण किया गया।

कथा में आज श्रीश्री 1008 महामण्डलेश्वर श्रीराम भूषण दास महाराज की भी उपस्थिति रही। कथा में मुख्य रूप से समिति के अध्यक्ष जय भोले, पिंकी त्यागी, धर्मेन्द्र त्यागी, अशोक पचौरी, भावेश राय, प्रिंस बाजपाई, गुलाब चंद दीक्षित, जितेन्द्र बत्रा, राजवीर सिंह, पवन त्यागी, रनवीर चौधरी, अमर शर्मा, कैलाशचंद त्यागी आदि उपस्थित रहे।

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