आस्था, परंपरा और भक्ति का उत्सव : : मॉर्निंग वॉक क्लब का दसवां एकादशी उद्यापन
Thu, Jan 29, 2026
आगरा। हरि नाम की गूंज, वैदिक मंत्रोच्चार और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था से ओतप्रोत केशव कुंज, प्रताप नगर स्थित बुर्जी वाला मंदिर परिसर में मॉर्निंग वॉक क्लब के तत्वावधान में दसवां दो दिवसीय सामूहिक एकादशी उद्यापन समारोह श्रद्धा, साधना और सनातन परंपरा के भावपूर्ण वातावरण में भव्य रूप से आरंभ हुआ।
समारोह के प्रथम दिन गुरुवार को पंडित चक्रपाणि पांडे द्वारा आशीर्वचन प्रदान किए गए। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को एकादशी व्रत के आध्यात्मिक महत्व से अवगत कराते हुए वर्ष की 26 एकादशी व्रत कथाओं का भावपूर्ण श्रवण कराया। उन्होंने कहा कि एकादशी व्रत आत्मसंयम, मन की शुद्धि और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ माध्यम है। एकादशी व्रत से जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। इस पावन अवसर पर 62 यजमानों ने विधि-विधान से एकादशी व्रत का पूजन एवं उद्यापन संपन्न किया। प्रत्येक यजमान की पूजन चौकी भक्ति भाव से सुसज्जित थी, जिसमें चांदी की गाय, चांदी की एकादशी, राम दरबार, तुलसी का पौधा सहित अन्य पूजन सामग्री विधिवत स्थापित की गई थी। मंदिर परिसर में एक साथ संपन्न हो रहे पूजन ने सामूहिक साधना की अनुपम छवि प्रस्तुत की।
मॉर्निंग वॉक क्लब के महामंत्री रमेश चंद्र अग्रवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि लगभग दस वर्ष पूर्व माघ मास के शुक्ल पक्ष की जया एकादशी के अवसर पर बुर्जी वाला मंदिर में सामूहिक एकादशी उद्यापन की यह परंपरा प्रारंभ की गई थी, जो निरंतर प्रत्येक वर्ष श्रद्धा और विश्वास के साथ निभाई जा रही है। एकादशी व्रत कथा के उपरांत गोदान संस्कार संपन्न हुआ। इसके बाद विधिवत हवन, शैय्या दान, 56 ब्राह्मणों को भोज कराया गया तथा श्रद्धालुओं को फलाहारी प्रसादी का वितरण किया गया।
क्लब के अध्यक्ष सीए मुकेश गोयल ने बताया कि सामूहिक एकादशी उद्यापन में प्रतिवर्ष आगरा सहित अन्य जनपदों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इस वर्ष अमेरिका से आए श्रद्धालु ने भी एकादशी उद्यापन में सहभागिता कर भारतीय सनातन संस्कृति के प्रति अपनी गहरी आस्था व्यक्त की। समारोह का द्वितीय दिवस शुक्रवार को संपन्न होगा, जिसमें गोविंद अभिषेक, विष्णु सहस्त्रनाम पाठ, 56 ब्राह्मणों को दान प्रक्रिया तथा प्रसादी वितरण विधिवत रूप से किया जाएगा।
कार्यक्रम व्यवस्था अखिलेश गोयल, विजय अग्रवाल, दीपक अग्रवाल, अनुराग अग्रवाल, विशाल अग्रवाल, रिंकू बांसल, राकेश गर्ग, राजीव जैन, निखिल गर्ग, सरोज अग्रवाल, रीना गोयल, मधु अग्रवाल, हेमलता आदि संभाल रहे हैं।
स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान : एकजुट होकर जागरूकता फैलाएं, कुष्ठ को हराएं
Thu, Jan 29, 2026
• 30 जनवरी से 14 फरवरी तक चलाया जाएगा स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान
• अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 तक 74 नये कुष्ठ मरीज खोजे गये
आगरा। जिले में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि (30 जनवरी) से स्पर्श कुष्ठ जागरुकता अभियान शुरू होगा, जो 14 फरवरी तक चलेगा। सभी स्वास्थ्य इकाइयों पर शपथ ली जाएगी और लोगों को कुष्ठ रोग के प्रति जागरूक किया जाएगा। इस दौरान कुष्ठ आश्रम में रहने वाले कुष्ठ रोगियों को एमसीआर चप्पल, कॉटन, गौज, सेल्फ केयर किट और दवाएं आदि वितरित की जाएंगी ।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरूण श्रीवास्तव ने बताया कि 30 जनवरी को बापू की पुण्यतिथि पर स्पर्श कुष्ठ जागरुकता अभियान संचालित होगा, जो 14 फरवरी तक चलेगा। इस जागरूकता अभियान के अवसर पर जनपद में ब्लॉक स्तर पर विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम होंगे। सीएमओ ऑफिस, सभी प्रशासनिक अधिकारी और ग्राम प्रधानों द्वारा जिलाधिकारी का संदेश जनता को पढ़कर सुनाया जाएगा और जागरूकता संबंधित अपील की जाएगी। ग्राम पंचायत और ग्राम सभा के अंतर्गत जगह-जगह पर नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किए जाएंगे। स्पर्श कुष्ठ जागरूकता से संबंधित कार्यक्रम स्कूल में आयोजित किए जाएंगे । अभियान को सफल बनाने के लिए सभी एकजुट होकर जन समुदाय को जागरूक करके कुष्ठ को हराकर मुक्ति पा सकते हैं।
जिला कुष्ठ रोग अधिकारी डॉ. जितेन्द्र कुमार लवानिया ने बताया कि ने बताया कि 30 जनवरी से 13 फरवरी तक स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। अभियान के दौरान आमजन को कुष्ठ रोग के प्रति जागरूक किया जाएगा। कुष्ठ रोग माइक्रो वेक्टीरियम लैप्री नामक जीवाणु से होता है। यह आनुवांशिक एवं छुआछूत रोग नहीं है। समय से जांच और उपचार कराने से दिव्यांगता से भी बचा जा सकता है। उन्होंने बताया कि कुष्ठ रोग की दवा सभी सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध होती है। उन्होंने बताया कि जनपद में अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 तक 74 नये कुष्ठ मरीज खोजे गये हैं। जिसमें पीबी-(पॉसी बेसिलरी) 15 और एमबी- (मल्टी बेसिलरी) 59 हैं। सभी का इलाज शुरू कर दिया गया है।
त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. ध्रुव गोपाल ने बताया कि राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत कुष्ठ मुक्त भारत का सपना साकार करने के लिए कुष्ठ रोगियों के परिवार के स्वस्थ व्यक्तियों व उसके आस-पास के 10 घरों के स्वास्थ व्यक्तियों के (कॉन्टेक्टस) को कुष्ठ रोग से सुरक्षित रखने के लिए रिफामपसिन दवा की सिगल सुपरवाइज्ड डोज दिया जाना प्रारंभ किया गया है। इस रिफामपसिन दवा की मात्रा सिगल डोज बैक्टीरिया को 99.99 प्रतिशत खत्म कर देती है। इस दवा का व्यक्ति पर कोई दुष्प्रभाव भी नहीं होता है।
डॉ. ध्रुव गोपाल ने बताया शारीरिक विकृति और कुरुपता ही कुष्ठ रोग के बारे में भय और सामाजिक घृणा का मूल कारण है। जल्द निदान और नियमित इलाज से कुष्ठरोग के कारण होने वाली विकृतियों से बचा जा सकता है। इसी प्रकार कुष्ठ रोग का निर्मूलन बहुत आसानी से हो सकता है। सिर्फ सभी का साथ और सहयोग चाहिए।
कुष्ठ रोग के सामान्य लक्षण
• शरीर का कोई भी दाग धब्बा जिस पर सुन्नपन हो, उसमें खुजली ना हो,उसमें पसीना ना आता हो कुष्ठ रोग हो सकता है
• शरीर की संवेदना वाहक नसों में मोटापन व दर्दीलापन कुष्ठ रोग का लक्षण हो सकता है। जांच व इलाज ना कराने पर विकलांगता आ सकती है।
• कान की पाली का मोटा होना व कान पर गांठे होना।
यह है लक्षण
• शरीर का कोई भी दाग धब्बा जिस पर सुन्नपन हो
• उसमें खुजली न हो, पसीना न आता हो, कुष्ठ रोग हो सकता है
• कान पर गांठे होना
• हथेली और तलवों पर सुन्नपन हो
उपचार
पीबी- (पॉसी बेसिलरी) छह माह तक इलाज
एमबी- (मल्टी बेसिलरी) 12 माह तक इलाज
’डायरिया से डर नहीं” : पीएसआई इंडिया व केनव्यू के सहयोग से आयोजित हुई कार्यशाला
Thu, Jan 29, 2026
आगरा। पापुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल इंडिया (पीएसआई इंडिया) और केनव्यू के सहयोग से गुरुवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के बैठक कक्ष में सेवा प्रदाताओं की अभिमुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गयी। कार्यशाला में पीएसआई इंडिया और केनव्यू के सहयोग से जनपद में चलाये जा रहे ‘डायरिया से डर नहीं’ कार्यक्रम को सफल बनाने में सेवा प्रदाताओं (स्टाफ नर्स) की भूमिका पर गहन चर्चा हुई। अभिमुखीकरण का मुख्य उद्देश्य डायरिया के बारे में समुदाय को विस्तार से जानकारी देना, ओआरएस और जिंक से डायरिया रोकथाम के उपायों के बारे में जानकारी देना और चिकित्सक के पास जाने की सलाह देना था।
कार्यशाला में पीएसआई इंडिया के पंकज कुमार ने बताया कि ‘डायरिया से डर नहीं’ कार्यक्रम उत्तर प्रदेश के 13 और बिहार के तीन जनपदों में चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य शून्य से पांच साल तक के बच्चों की डायरिया के कारण होने वाली मृत्यु दर को शून्य करना और दस्त प्रबंधन को बढ़ावा देना है। डायरिया से किसी भी बच्चे की मौत न होने पाए, इसमें स्टाफ नर्स अहम भूमिका निभा सकते हैं।
अभिमुखीकरण कार्यशाला की अध्यक्षता डॉ. रिशी गोपाल ने की। उन्होंने डायरिया के बारे में स्टाफ नर्सों का अभिमुखीकरण करते हुए कहा कि डायरिया से बचाव के लिए स्वच्छता बहुत जरूरी है। इसलिए अपने घर और आस-पास साफ़-सफाई का पूरा ख्याल रखें । बच्चों को कुछ भी खिलाने-पिलाने से पहले हाथों को अच्छी तरह साबुन-पानी से अवश्य धुल लें। उन्होंने ‘डायरिया से डर नहीं’ कार्यक्रम को सफल बनाने में हरसम्भव सहयोग का आश्वासन दिया।
इस मौके पर शहरी स्वास्थ्य समन्वयक आकाश गौतम ने डायरिया पर पीएसआई इंडिया द्वारा कराई जा रही अभिमुखीकरण कार्यशाला की सराहना की एवं आश्वासन दिया कि आगे भी इस तरह के आयोजन में सहयोग करेंगे। इसके साथ ही यह भी कहा कि लोग अपने घरों में ओआरएस एवं ज़िंक जरूर रखें प् अभिमुखीकरण कार्यशाला में सोमचंद्र, रक्षा, पीएसआई इंडिया से आरती और स्टाफ नर्स उपस्थित रहे।