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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस : संघर्ष और सेवा की मिसाल बनीं महिलाएं, ‘शी विल इंस्पायर’ ने किया सम्मान

Pragya News 24

Mon, Mar 9, 2026
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आगरा। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर शी विल इंस्पायर संस्था द्वारा फतेहाबाद रोड स्थित होटल जेपी पैलेस में सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में समाज में परंपरागत सीमाओं को तोड़ते हुए संघर्ष और परिश्रम के माध्यम से स्वयं तथा अपने परिवार के जीवन को नई दिशा देने वाली छह प्रेरक महिलाओं को सम्मानित किया गया।

संस्था की संस्थापक अध्यक्ष राशि गर्ग ने बताया कि संस्था का उद्देश्य समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाली महिलाओं को मंच देना और उनके कार्यों को समाज के सामने लाना है, ताकि अन्य महिलाएं भी उनसे प्रेरणा लेकर आगे बढ़ सकें।

कार्यक्रम संयोजक डॉ. भास्कर ज्योति और पूजा लूथरा ने सम्मानित होने वाली सभी महिलाओं का परिचय देते हुए उनका स्वागत किया। इस अवसर पर मूक बधिरों को आवाज बनने वाली ऋषिका मिश्रा, स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान देने वाली नजमा, उषा और संतोष, शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय श्यामा देवी तथा अपनी विशिष्ट पाक कला से पहचान बनाने वाली रेनू शर्मा को प्रशस्ति पत्र और उपहार देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान केक काटकर महिला दिवस को उत्सव के रूप में मनाया गया और सभी सदस्यों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर दिव्या गुप्ता, डॉ. अंशिका सरकार, कृतिका खन्ना, मीनाक्षी किशोर, अदिति, कृषिका, आशिमा पुरी, कनिका, अंकिता माथुर, कीर्ति खंडेलवाल, दीक्षा असवानी, दीपिका, डॉ. सुनैना, राशि, तन्वी, पूजा असवानी आदि उपस्थित रहीं।

संघर्ष से लिखी सफलता की कहानी :
ऋषिका मिश्रा – समाज की मुख्यधारा से कटे हुए मूक-बधिर लोगों के लिए आगरा की बेटी और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ऋषिका मिश्रा एक प्रेरणास्त्रोत बन चुकी हैं। वे सरकारी योजनाओं और महत्वपूर्ण जानकारियों को साइन लैंग्वेज के माध्यम से दिव्यांगों तक पहुंचा रही हैं, ताकि दिव्यांग समुदाय भी समाज के विकास में बराबरी से भागीदारी कर सके। कई मामलों में जब मूक-बधिर बच्चियों और महिलाओं के साथ अन्याय होता है तो पुलिस और न्यायालय में भी ऋषिका साइन लैंग्वेज के माध्यम से उनकी पीड़ा और बात को सामने रखने में मदद करती हैं। हाल ही में महिला दिवस पर उनके द्वारा बनाया गया जागरूकता वीडियो भी काफी चर्चा में है। महाकुंभ के अमृत स्नान के दौरान कई दिव्यांग लोग इस धार्मिक अवसर से वंचित रह गए थे। ऐसे में ऋषिका ने साइन लैंग्वेज के माध्यम से वीडियो बनाकर उन्हें आवश्यक जानकारी दी, जिससे वे भी इस आध्यात्मिक अवसर से जुड़ सके।
नजमा – शहर के एक अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ के रूप में कार्यरत नजमा ने विपरीत परिस्थितियों में अपने बेटे का पालन-पोषण किया। बेटे के केवल नौ माह का होने पर ही उनके पति ने दूसरा निकाह कर लिया, लेकिन नजमा ने हार नहीं मानी और अपने बेटे को पढ़ा-लिखाकर काबिल बनाया।
संतोष – वर्ष 1999 में पति की मृत्यु के बाद संतोष ने चार बच्चों की परवरिश की। नर्सिंग स्टाफ के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
श्यामा देवी सिकरवार – ग्वालियर रोड निवासी श्यामा देवी के पति के निधन के बाद उन्होंने अकेले ही तीन बच्चों का पालन-पोषण किया और उन्हें शिक्षित कर जीवन में आगे बढ़ाया।
रेनू शर्मा – जीवनी मंडी निवासी रेनू शर्मा पिछले 27 वर्षों से घरों में खाना बनाकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं। पति के निधन के बाद उन्होंने कठिन परिस्थितियों में बेटियों की शादी कराई और बेटे को पढ़ाकर इतना काबिल बनाया कि आज वह बैंक में कार्यरत है।
उषा – नूरी दरवाजा निवासी उषा नर्सिंग स्टाफ के रूप में कार्यरत हैं। पति की मृत्यु के बाद उन्होंने छह बच्चों का पालन-पोषण किया, उन्हें शिक्षित किया और आज बेटी की शादी कर सभी बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ाया।

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