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जर्मन शैफर्ड... : विदेशी नस्ल के कुत्ता पालने के शौक को खर्च की मोटी कीमत, बुढ़ापे में छोड़ दिया सड़कों पर

Pragya News 24

Tue, Mar 24, 2026
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आगरा। अपने आस-पड़ोस के कुत्तों को जो लोग रोटी नहीं डालते वह विदेशी नस्ल के कुत्ते अपने शौक पूरा करने के लिए लाखों की कीमत देकर घर लाते हैं। लेकिन पालने में असमर्थ होने या कत्ते का बुढ़ापा आने पर उन्हें मुंह बांधकर सड़कों पर बेसहारा छोड़ दिया जाता है। रविवार की रात को भी वॉटरवर्क्स चौराहे पर ढाई वर्ष के जर्मन शैफर्ड को मुंह बांध कर सड़क पर छोड़ दिया गया। रात 11.30 बजे कैस्पर्स होम की चेयरपर्सन विनीता अरोड़ा के पास फोन पहुंचा।

विनीता अरोड़ा ने बताया कि मैंने हर संभव नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन न तो बचाव दल,न ही हमारी हाल ही में शुरू हुई एम्बुलेंस सेवा और न ही 112 पर कोई जवाब मिला। अंत में डॉ. नेहरू, उनके स्टाफ और एक दयालु स्थानीय परिवार की मदद से आधी रात के बाद उसे बचाया गया। उस परिवार ने उसे डॉ. नेहरू के अस्पताल तक पहुंचाया। डॉ. नेहरू ने रात भर उसे अपने पास रखा और हमारे सहयोगी ऋषभ ने उसे कैस्पर होम में छोड़ दिया।

यह बेहद दुखद और चौंकाने वाली बात है कि कुत्ते का मालिक अपने ही पालतू जानवर को तड़पते, दम घुटते और दर्दनाक मौत मरते देखना चाहते थे। यह तीसरी ऐसी घटना है जब एक जर्मन शेफर्ड कुत्ते को उसके पैर और मुंह बांधकर सड़कों पर फेंक दिया गया था। एक तरफ तो भारतीय नस्लों के कुत्तों से नफरत की जाती है। उन्हें सताया जाता है। उनका विस्थापन किया जाता है और उन्हें मार डाला जाता है। वहीं दूसरी तरफ लोग अपने पालतू जानवरों की ठीक से देखभाल भी नहीं कर पाते। कैस्पर्स होम के शैल्टर में कम से कम 16 rescued पालतू जानवर हैं, जिनमें से 5 जर्मन शेफर्ड हैं।

विनीता अरोड़ा ने कहा कि हम अपने पशु चिकित्सा विभाग के सभी अधिकारियों से आग्रह करते हैं कि वे सभी डॉग ब्रीडर और विक्रेताओं के लिए ब्रीडिंग लाइसेंस अनिवार्य करें। विदेशी नस्ल के पालतू जानवरों का पंजीकरण और माइक्रोचिपिंग करवाएं। अन्यथा ये विदेशी नस्लें हर दिन कूड़ेदानों, सड़कों और कचरे के डिब्बों में दिखाई देंगी। हमारे द्वारा बचाए गए कुत्तों को भी गोद नहीं लिया जा रहा है क्योंकि सभी अवैध, अपंजीकृत ब्रीडर्स लोगों को धोखा दे रहे हैं। मिक्स्ड नस्ल के पिल्ले बेच रहे हैं। जिससे लाखों विदेशी नस्ल के कुत्तों का जीवन बर्बाद हो रहा है।

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