अपने घरों को सारे लोग बचा लेंगे किंतु... : देशभक्ति के स्वर में गूंजा राष्ट्रीय कवि सम्मेलन, साहित्य निधि एवं ओपन कला मंच ने किया आयोजन
Pragya News 24
Thu, Jan 29, 2026
आगरा। “अपने घरों को सारे लोग बचा लेंगे किंतु, कौन है जो प्राण देके देश को बचाएगा?”, इन ओजस्वी पंक्तियों के साथ देशभक्ति, वीर रस और राष्ट्र चेतना से सराबोर ‘गणतंत्र दिवस के रंग कवियों के संग’ राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन रैंबो संस्था के तत्वावधान में साहित्य निधि एवं ओपन कला मंच द्वारा खंदारी कैंपस स्थित जेपी सभागार में सम्पन्न हुआ।
शहीदों को नमन एवं मातृभूमि के सम्मान को समर्पित इस कवि सम्मेलन में मध्य प्रदेश, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश से पधारे ख्यातिप्राप्त कवियों ने अपने ओजस्वी काव्यपाठ से सभागार को तालियों से गुंजायमान कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सुरेश चंद्र गर्ग, अजय भार्गव, सुनील शर्मा, विजेंद्र रायजादा, डॉ सोनू दीक्षित, रोहित जैन, सतीश चंद्र बंसल, कुलदीप ठाकुर, अखिलेश चन्द्र सक्सेना द्वारा दीप प्रज्वलन एवं शहीदों के स्मरण के साथ किया गया। उन्होंने कहा कि कविता राष्ट्र की आत्मा होती है और ऐसे आयोजन समाज में चेतना का संचार करते हैं।
कार्यक्रम संयोजक हीरेंद्र ‘हृदय’ ने कहा कि जब देश की अस्मिता पर प्रश्न उठते हैं, तब कलम ही सबसे बड़ा शस्त्र बनती है।
लोग रखते होंगे, कलेजा सीने में, हम तौ हथेली पेलिए फिरते हैं, पंक्तियों का पाठ अजय रंगीला ने किया।
कवि मोहित सक्सेना ने देशहित में त्याग और बलिदान का आह्वान करते हुए कहा—“अपने घरों को सारे लोग बचा लेंगे किंतु, कौन है जो प्राण देके देश को बचाएगा?”
मध्य प्रदेश के सुप्रसिद्ध कवि शशिकांत यादव ‘शशि’ (देवास) ने राष्ट्रवीरों को स्मरण करते हुए पाठ किया,
“शिवाजी, राणाप्रताप, अब्दुल हमीद और शेखर भगत की नजीर बन जायेगी।” डॉ. कमलेश शर्मा (इटावा) ने अन्याय के विरुद्ध कलम की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा, “जहां लोग अन्याय पर मौन रहते, वहां पर हमारी कलम बोलती है।” व्यंग्य और सत्य के सशक्त स्वर में डॉ. शशिकांत यादव ‘शशि’ ने प्रस्तुत किया, “सब कीड़े बाहर निकले हैं, चुटकी भर तो सच बोला है।”
राजस्थान (दौसा) से पधारी कवयित्री सपना सोनी ने भावनात्मक प्रस्तुति दी, “मेरे मन की धरा पर मधुर भाव से, चित्र अपना सलौना बना दीजिये।”
कार्यक्रम संयोजक हीरेंद्र ‘हृदय’ ने मातृभूमि की रक्षा को सर्वोपरि बताते हुए कहा,“यदि कोई भी अस्मिता उछाले मातृभूमि की, तो विनय को छोड़कर बस युद्ध होना चाहिए।”
कार्यक्रम का संचालन शशिकांत यादव ने किया। कार्यक्रम संयोजक राकेश सक्सेना थे। इस अवसर पर नारायण बहरानी, मनोज गुप्ता बाबा, कुलदीप पाठक, अंजुल कुलश्रेष्ठ, निर्मल चाहर, आरके गुप्ता, राकेश निर्मल आदि उपस्थित रहे
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