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वृद्धावस्था में क्योर से ज्यादा केयर की जरूरत : जीरिएट्रिक सोसायटी ऑफ इंडिया की 38वीं वार्षिक कार्यशाला में जुटे देश विदेश के 500 से अधिक विशेषज्ञ

वृद्धावस्था की समस्याओं, बीमारियों के कारण और निवारण पर मंथन

आगरा। कभी परिवार का मुखिया समझे जाने वाले वृद्धों के लिए भारत के एकल परिवारों में अब घर में जगह नहीं रही। ओल्ड एज होम की संख्या में हो रहा इजाफा इसका सबूत है। जबकि वृद्धावस्था की जटिल समस्याओं और बीमारियों को क्योर करने के बजाय केयर की जरूरत होती है। यह बात होटल क्लार्क-शीराज में आयोजित जीरिएट्रिक सोसायटी ऑफ इंडिया (जीएसआई) की तीन दिवसीय 38वीं वार्षिक कार्यशाला में वृद्धावस्था में मांसपेसियों (सारकोपीनिया) की कमजोरी पर राष्ट्रीय गाइड लाइन जारी करते हुए जीएसआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अतुल कुलश्रेष्ठ ने अपने व्याख्यान में कही।

बताया कि लगभग 45 वर्ष की आयु के बाद व्यक्ति की क्षमता में कमी ने लगती है। सारकोपीनियां (मासपेशियों की कमजोरी) के कारण चलते-चलते गिर जाना, सामान हाथ से छूट जाना, सीढ़ी चढ़ने में दिक्कत जैसी परेशानी होती है। इस समस्या को कम करने के लिए जीएसआई की 15 डॉक्टरों की टास्क फोर्स ने 6 माह में जो निष्कर्ष निकाला उसकी राष्ट्रीय गाइड लाइन आज प्रस्तुत की गईं। जिसमें स्ट्रेचिंग व्यायाम, खाने में प्रोटीन की अधिकता के साथ मिनरल, विटामिन आदि शामिल करने पर जोर दिया गया। सीएसआई के सचिव विवेक हांडाने कहा कि संयुक्त परिवारों के दौर में भारतीय डेमोग्राफी बहुत अच्छी थी।

आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. सुनील बंसल ने वृद्धावस्था में ब्लड प्रेशर मैनेजमेंट और उससे होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी। सचिव डॉ, कैलाश विश्वानी ने बताया कि कार्यशाला में 500 से अधिक विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं। 80 से अधिक शोधपत्र प्रस्तुत किए जा रहे हैं। अध्यक्षता पद्मश्री डॉ. डीके हाजरा व डॉ. ओपी शर्मा ने की। संचालन डॉ. शीष गौतम ने किया।

इस अवसर पर मुख्य रूप से डॉ. एके गुप्ता, डॉ. रमेश धनीजा, डॉ. शोक शिरोमणी, डॉ. अजीत चाहर, डॉ. अशोक शर्मा, डॉ. शम्मी कालरा, डॉ. प्रभात अग्रवाल, डॉ. निखिल पुरसनानी, डॉ. शुभम जैन, डॉ. श्वेता, डॉ. ज्योति आदि उपस्थित थे।

देश में 10 हजार जीरीएट्रिक एक्सपर्ट की जरूरत हैं सिर्फ 3-4 हजार
आगरा। डॉ. कौशिक रंजन दास (पूर्व अध्यक्ष, जीएसआई) कलकत्ता ने बताया कि देश में बुजुर्गों (60 से अधिक वर्ष के लोग) की संख्या लगभग 15 करोड़ है। जिनकी स्वास्थ सुविधाओं के लिए कम से कम 10 हजार जीरिएट्रिक एक्पर्ट की जरूरत है, जबकि हैं सिर्फ 3-4 हजार। 2025 में भारत में हर पांच व्यक्ति में एक बुजुर्ग होगा। वृद्धावस्था की समस्याएं और इलाज दोनों युवावस्था से अलग हैं। याददाश्त और मांसपेशियों की कमजोरी के साथ शारीरिक क्षमता घटने लगती है। जिसमें इलाज से साथ देखभाल की अधिक जरूरत होती है। जीएसाई जीरीएट्रिक में ऑन लाइन व ऑफ लाइन कोर्स करवा रहा है। वृद्धावस्था में टीबी पर डॉ. राहुल भट्टाचार्य, यूके के डॉ. अनिल वृद्धावस्था में उपचार के तरीके पर व्याख्यान दिया।

13 दिसम्बर को शाम 6 बजे होगा उद्घाटन
जीरिएट्रिक सोसायटी ऑफ इंडिया की 38वीं वार्षिक कार्यशाला का शुभारम्भ 13 दिसम्बर को शाम 5 बजे होटल क्लार्क-सीराज में होगा। मुख्य अतिथि उप्र उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय होंगे। इस अवसर पर एस एन मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. प्रशान्त गुप्ता भी मौजूद रहेंगे। 75 पोस्ट ग्रेजुएट विद्यार्थिर्यों को जीरिएट्रिक कोर्स की प्रैक्टीकल ट्रेनिंग व प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे। सुबह 10 बजे से साइंटिफिक सेशन प्रारम्भ होंगे।

वृद्धाश्रम में बुजुर्गों को सिर्फ छत नहीं सम्पूर्ण सुविधाएं मिलें
जीएसआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अतुल कुलश्रेष्ठ ने बताया कि डब्ल्यूएचओ व यूएनआई ने 2021-2030 तक 10 वर्ष में सभी देशों के लिए केयर ऑफ एल्डरली पॉप्यूलेशन के लिए गाइड लाइन जारी की। जिसमें वृद्धाश्रमों में दवा, पूजा, खाने के अलावा सम्पूर्ण व्यवस्था होनी चाहिए। जबकि ज्यादातर वृद्धाश्रमों में बुजुर्गों को सिर्फ आराम दिया जा रहा है जिससे वह खुद को अकेला और अवसाद में महसूस कर रहे हैं। बुजुर्गों का आत्मविश्वास बढ़ने के साथ वह खुद को जिम्मेदार भी समझें इसके लिए उन्हें विभिन्न क्रियों से जोड़ा जाना चाहिए। जिससे दिमाग का खालीपन दूर हो। उन्होंने दयालबाग का उदाहरण देते हुए कहा बुजुर्गों को छोटे-छोटे कामों (खेती, कुछ कलात्मकता वाले काम) से जोड़ने के साथ सामाजिक कार्यों में व्यस्त रखा जाना चाहिए।

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