Tue 27 Oct 2026
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मानसिक स्वास्थ्य पर वैश्विक संवाद का केंद्र बना आगरा : फीलिंग माइंड्स संस्था के कार्यालय पर जुटे अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ, मानसिक स्वास्थ्य बन सकता है वैश्विक त्रासदी

आगरा। मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक शिक्षा के क्षेत्र में आगरा ने रविवार को एक नई वैश्विक पहचान स्थापित की, जब विमल विहार, सिकंदरा-बोदला रोड स्थित फीलिंग माइंड्स संस्था के कार्यालय पर विशेष अंतरराष्ट्रीय मनोवैज्ञानिक संवाद सत्र का आयोजन किया गया। इस संवाद में विश्वप्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञों ने एक मंच पर उपस्थित होकर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े समकालीन, व्यवहारिक एवं नीतिगत विषयों पर गहन मंथन किया।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ. आर्थर सी. इवांस, वाइस प्रेसिडेंट एवं सीईओ, अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन तथा विश्वविख्यात फिलाडेल्फिया मॉडल के निर्माता उपस्थित रहे। उनके साथ डॉ. एन वर्नन पूर्व अध्यक्ष अल्बर्ट एलिस इंस्टीट्यूट, न्यूयॉर्क, अमेरिका एवं डॉ. रेनर कुर्ज़, मुख्य मनोवैज्ञानिक, हुकामा एनालिटिक्स लिमिटेड, लंदन ने भी अपने विचार रखे।

कार्यक्रम में फीलिंग्स माइंड्स संस्था की संस्थापक एवं आईएसएमएचएए की अध्यक्ष डॉ. चीनू अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि मानसिक स्वास्थ्य किसी एक देश, संस्कृति या समुदाय का विषय नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक मानवीय सरोकार है। आज आवश्यकता है कि दुनिया भर के मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर, नीति निर्माता, शिक्षक, चिकित्सक, अभिभावक और समुदाय एकजुट होकर कार्य करें। जब तक वैश्विक स्तर पर सहयोग, साझा अनुभव और सामूहिक जिम्मेदारी नहीं होगी, तब तक मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियों का स्थायी समाधान संभव नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि “फीलिंग माइंड्स और आईएसएमएचएए जैसे मंच इसी वैश्विक एकजुटता को सशक्त बनाने का प्रयास हैं, जहां नीति, शोध और व्यवहार एक साथ आकर ठोस और प्रभावी कार्यवाही का रूप लेते हैं।

मानसिक स्वास्थ्य की संवेदना न समझी तो वैश्विक त्रासदी जैसी बन सकती है स्थिति : डॉ.इवांस
कार्यक्रम का केंद्रीय आकर्षण डॉ. आर्थर सी. इवांस और डॉ. चीनू अग्रवाल के बीच हुआ विशेष संवाद रहा। इस संवाद में वैश्विक स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियों, भावनात्मक शिक्षा की भूमिका, नीति और व्यवहार के बीच की खाई तथा समाज में मानसिक स्वास्थ्य को सशक्त बनाने के व्यावहारिक एवं दीर्घकालिक उपायों पर सार्थक चर्चा की गई। डॉ. आर्थर सी. इवांस, वाइस प्रेसिडेंट एवं सीईओ, अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन तथा विश्वविख्यात फिलाडेल्फिया मॉडल के निर्माता ने कहा कि यदि समय रहते मानसिक स्वास्थ्य पर एकजुट होकर जागरूकता लाने का काम नहीं किया गया तो ये वैश्विक आपदा बन सकता है।

सामाजिक उत्तरदायित्व है मानसिक स्वास्थ्य
इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मेयर हेमलता दिवाकर ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य विषय हर वर्ग से सम्बन्धित है। हर वर्ग, हर क्षेत्र के लोग मानसिक स्वस्थ्य रहेंगे तभी समझ विकास और खुशहाली के रास्ते पर बढ़ेगा।
चमड़ा एवं फुटवियर उद्योग परिषद अध्यक्ष पूरन डावर ने कहा कि ये विडम्बना है कि मानव तपस्या के जिस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का निर्माण हुआ था आज उसी के कारण पश्चिम देशों में लोग अवसाद के शिकार हो रहे हैं।
धन्यवाद ज्ञापित करते हुए संस्था के उपाध्यक्ष डॉ. सुशील गुप्ता ने कहा कि आज मानसिक स्वास्थ्य केवल चिकित्सकीय विषय नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक उत्तरदायित्व और नीति निर्धारण का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय संवाद समाज में जागरूकता के साथ-साथ ठोस और प्रभावी कार्यवाही की दिशा तय करते हैं।
पर्यावरणविद एवं सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता केसी, सेंट जॉन्स कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ एसपी सिंह ने भी अपने विचार रखे।

दिल्ली में होगी तीन दिवसीय ग्लोबल मेंटल हेल्थ पॉलिसी समिट
कार्यक्रम में आईएसएमएचएए के कोषाध्यक्ष डॉ. रविंद्र अग्रवाल ने ग्लोबल मेंटल हेल्थ पॉलिसी समिटदृ2026 की जानकारी साझा की। इस अवसर पर डिजिटल पोस्टर भी जारी किया गया। उन्होंने बताया कि यह तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन 6, 7 एवं 8 जनवरी को इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। समिट की थीम “ब्रिजिंग पॉलिसी एंड प्रैक्टिस दृ लेट एक्शन स्पीक” रखी गई है, जिसका उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य नीतियों को व्यवहारिक क्रियान्वयन से जोड़ना है। डॉ. रविंद्र अग्रवाल ने आगे बताया कि समिट में नीति निर्माता, शोधकर्ता, शिक्षाविद, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, चिकित्सक एवं सामाजिक कार्यकर्ता एक मंच पर एकत्र होकर राउंड टेबल चर्चा, अकादमिक सत्र, कीनोट व्याख्यान, पोस्टर एवं केस स्टडी प्रस्तुतियों के माध्यम से ठोस, मापनीय और प्रभावी समाधान प्रस्तुत करेंगे।

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