डेल्फिक एसोसिएशन : 'संस्कृति संगम 2026' में झलकी भारत की सांस्कृतिक विविधता, राष्ट्रभक्ति से गूंजा सूरसदन
Pragya News 24
Sun, Jul 19, 2026
आगरा। डेल्फिक एसोसिएशन द्वारा सूरसदन प्रेक्षागृह में आयोजित 'संस्कृति संगम 2026' भारतीय संस्कृति, लोक परंपराओं और युवा प्रतिभाओं का भव्य उत्सव बन गया। गणेश वंदना से आरंभ हुए कार्यक्रम में देश की सांस्कृतिक विविधता को लोक एवं शास्त्रीय नृत्य, संगीत और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से जीवंत किया गया। आयोजन की विशेषता यह रही कि बस्तियों की छिपी प्रतिभाओं को मंच प्रदान कर उन्हें अपनी कला का प्रदर्शन करने का अवसर दिया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ एडीजी उत्तर प्रदेश एवं डेल्फिक एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. आर.के. स्वर्णकार, पीएसी कमांडेंट नरेंद्र कुमार सिंह, आईएएस अधिकारी अभिषेक मिश्रा, अनीता सिसोदिया, राहुल वर्मा, मनीष गोयल एवं हर्ष गुप्ता ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
अपने संबोधन में डॉ. आर.के. स्वर्णकार ने कहा कि भारत विविधताओं में एकता का अद्भुत उदाहरण है और यहां प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता केवल उन्हें उचित मंच और अवसर प्रदान करने की है। उन्होंने कहा कि डेल्फिक एसोसिएशन इसी उद्देश्य के साथ लगातार कार्य कर रही है।
आयोजक अनीता सिसोदिया ने बताया कि संस्था बस्तियों में रहने वाले प्रतिभाशाली बच्चों और युवाओं को पहचानकर उन्हें प्रशिक्षित करने तथा बड़े मंच तक पहुंचाने का कार्य कर रही है, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़े और वे समाज में अपनी अलग पहचान बना सकें।
कार्यक्रम में 'देश रंगीला' की प्रस्तुति के साथ श्रीकृष्ण रासलीला, कश्मीरी लोकनृत्य, कालबेलिया, पंजाबी, मराठी, भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी और कथक सहित विभिन्न लोक एवं शास्त्रीय नृत्यों ने भारतीय संस्कृति की विविधता और एकता का आकर्षक चित्र प्रस्तुत किया। सावन गीतों, राजपूताना शौर्य को दर्शाती तलवारबाजी तथा कथक युगल नृत्य ने भी दर्शकों की भरपूर सराहना प्राप्त की।
संगीत प्रस्तुति में आईएएस अधिकारी अभिषेक मिश्रा एवं डॉ. सरला शर्मा ने गिटार, सिंथेसाइजर और पियानो की मधुर संगत के साथ युगल गायन प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं।
कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया जब योगेश परमार और उनकी टीम ने 'कलयुग का श्रवण कुमार' नाटक का मंचन किया। माता-पिता के प्रति बदलते सामाजिक व्यवहार और संवेदनहीन होती संतानों की सोच पर आधारित इस प्रस्तुति ने दर्शकों को भावुक कर आत्ममंथन के लिए प्रेरित किया।
समापन 'वंदे मातरम्' की राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुति और सामूहिक हनुमान चालीसा के गायन के साथ हुआ। पूरे आयोजन में भारतीय संस्कृति, कला, संस्कार और राष्ट्रप्रेम का अनुपम संगम देखने को मिला।
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