: साहित्यिक गतिविधियों के लिये आगरा की फिर पहचान बनेः राजीव खंडेलवाल
Sat, Feb 10, 2024
आगरा। प्रख्यात इंग्लिश पॉइंट और राइटर राजीव खंडेलवाल ने कहा है कि बिना किसी पूर्व निर्धारित कथावस्तु पात्र चरित्र की परिकल्पना के ही उन्होंने अपनी साहित्यिक कृतियों का सृजन किया है। अपने अनुभवों, बचपन में घटी घटनाओं को उपन्यास की कथावस्तु के रूप में पिरोया है। उन्होंने कहा कि “ए समर स्प्री” उपन्यास उन्हें अपने जीवन के यथार्थ का अनुभव उन सभी को साहित्यिक क्षेत्र में पदार्पण को प्रेरित करेगा जिन्होंने अपने जीवन में संघर्षमय रहा है।
वह अपने नवीनतम उपन्यास “ए समर स्प्री” पर ताजगंज स्थित शीरोज हैंग आउट में आयोजित अमृता विद्या-एजुकेशन फार इमोट्रलिटी और छांव फाउंडेशन के तत्त्वावधान में संवाद कार्यक्रम के तहत संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। एक अनुभवी साहित्य सृजक के रूप में श्री खंडेलवाल ने कहा कि हर व्यक्ति के अपने कुछ ऐसे अनुभव होते हैं, जिन्हें कलम बद्ध कर सकने की मौलिक नैसर्गिक शक्ति होती है। अंतर्मन की इस कथा और अपने विचारों को लिपिबद्ध करना ही कथा व साहित्य सृजन है।
उन्होंने कहा कि “ए समर स्प्री” दिलचस्प उपन्यास होने के साथ ही जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिये प्रेरणा देने वाला भी सावित होगा। उन्होंने कहा कि चुनौतियों का सामना करने में युक्तियों को अपनाना पड़ता है, निश्चित ही उपन्यास के सुधी पाठक इस सच्चाई को भी समझेंगे। श्री खंडेलवाल ने कहा कि आगरा अपने ऐतिहासिक स्मारकों के लिये बहुत ही प्रसिद्ध है किंतु वह चाहते हैं कि इसकी साहित्यिक गतिविधियों के रूप में भी पहचान बने। उन्होंने कहा कि आगरा में साहित्यिक गतिविधियाँ पहले होती रही है, अब भी यहां के कलमकारों में अपनी मौलिक क्षमताऐं है जिन्हे प्रोत्साहित करने भर से आगरा पुनः साहित्यिक गतिविधियों से भरपूरता वाला हो सकता है। यही उनका अपना सपना भी रहा है।
शीरोज हैंग आउट में आयोजित संवाद के आयोजन पर चर्चा करते हुए ‘अमृत विद्या एजुकेशन फार इमोर्टलिटी’ के सेक्रेटरी और ‘छांव फऊंडेशन’ के एडवाइजरी बोर्ड के सदस्य अनिल शर्मा ने कहा है कि एक वक्त था जब की इंग्लिश लिटरेचर खास कर पोइट्री पर आगरा में सेमिनार, डिस्कशन होना आम था, इंटरनेशनल स्तर के समालोचक स्व डॉ रामविलास शर्मा इंग्लिश लिटरेचर क्षेत्र में आगरा का प्रतिनिधि नाम हुआ करते थे। युवाओं के लिये वह साहित्य सृजन के लिये प्रेरक माहौल था। एसिड सर्वाइवर के सहयोग से साहित्यिक गतिविधियों से भरपूर रहे दौर को पुनः शुरू करने का प्रयास है।
शीरोज हैंगआउट कैफे के राम भरत उपाध्याय ने कहा कि लिटरेचर क्षेत्र में यह हमारा आधारभूत प्रयास है, कई एसिड अटैक सर्वाइवर अपनी भावनाओं को इंग्लिश पोएट्री के माध्यम से व्यक्त करने का अवसर पा सकी। इस आयोजन से उनको अपने विचार व्यक्त करने की प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने कहा कि आने वाले वक्त में इस प्रकार के लिटरेचर प्रोग्राम होते रहने की उम्मीद है। निश्चित रूप से चुनौतीपूर्ण हालात में जिंदगी जीने वाली महिलाओं को इस प्रकार के आयोजन अनुभूतियों और अभिव्यक्ति व्यक्त करने के अवसर होंगे।
अमृता विद्या-एजुकेशन फार इमोट्रलिटी और छांव फाउंडेशन का प्रयास है कि विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धि और विशिष्टतायें प्राप्त करने वालों से आगरा के नागरिकों को संवाद करने का अवसर प्रदान किया जाये। श्रंखला के पहले संवाद को तेजाब फेंकने से प्रभावित और जीवन संघर्ष पीड़ित महिलाओं के द्वारा प्रायोजित किया गया है।
राजीव खण्डेलवाल के लिटरेचर पर शोध
आगरा के व्यवसायी एवं अंग्रेजी के प्रख्यात कवि राजीव खण्डेलवाल इंग्लिश लिटरेचर जगत में प्रख्यात हैं। जिनके द्वारा लिखी गयी इंग्लिश पोएट्री की नौ किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं एवं समीक्षओं के रूप में छः किताबें उनके लेखन के ऊपर लिखी जा चुकी हैं। श्री खण्डेलवाल के लेखन पर सेंट अलोयसिस कॉलेज जबलपुर के दो विद्यार्थियों ने शोध कार्य भी किया है। उनके चर्चित उपन्यास “ए समर स्प्री” पर समीक्षक नागमणि ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि यह उपन्यास सिर्फ एक उपन्यास ही नहीं बल्कि मैनेजमेंट के छात्रों के लिये एक गाइडलाइन है यह बात राजीव खण्डेलवाल को विशेष लेखक बनाती है वहीं शिक्षाविद डॉ दीनदयाल का कहना है कि यह उपन्यास सफल व्यावसायिक रणनीतियों और युक्तियों का एक महत्वपूर्ण कोष है। इस उपन्यास के ऊपर जम्मू कश्मीर में शोध कार्य हो रहा है।
कार्यक्रम का संचालन अनिल शर्मा के द्वारा किया गया। साहित्यिक संगोष्ठी के सहभागियों में डॉ. मधु भारद्वाज, अनिल कुमार शर्मा, सुधीर नारायण, डॉ शिकरेश तिवारी, ब्रिग विनोद दत्ता, अमीर अहमद जाफरी एडवोकेट, डॉ. मधुरिमा शर्मा, रमेश पंडित, महेश धाकड़, राजीव सक्सेना, डॉ. अनुज कुमार, डॉ. शशि गुप्ता, शाहीन, डॉ. पीएन अस्थाना आदि शामिल थे।
: बीमारियों से मृत्यु का 48 फीसदी कारण सूक्ष्मजीवों का संक्रमण - डॉ कटोच
Fri, Feb 9, 2024
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इंडियन एसोसिएशन ऑफ मेडिकल माइक्रोबायोलॉजिस्ट की दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारम्भ, देश में माइक्रोबायोलॉजिस्ट की कमी दूर करने पर जोर
आगरा। भारत में बीमारियों से होने वाली मृत्यु में 48 फीसदी कारण सूक्ष्म जीवों से होने वाला संक्रमण है। इस पर नियंत्रण के लिए मेडिकल माइक्रोबायोलॉजीकल मोल्यीक्यूलर सुविधाओं का बेहतर नेटवर्क की जरूरत है। जिससे संक्रमण की समस्या को प्रारम्भिक अवस्था में जाना जा सके। देश में माइक्रोबयोलॉजिस्ट की काफी कमी है, जिसे दूर किया जाना चाहिए। देश की कुल जनसंख्या की 18 फीसदी आबादी उप्र में है। इसलिए उप्र में इनफेक्शन से होने वाली बीमारियों पर विशेष ध्यान केन्द्रित होना चाहिए। आईसीएमआर के पूर्व डीजी डॉ. बीएम कटोच ने यह बात एसएन मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग द्वारा आयोजित इंडियन एसोसिएशन ऑफ मेडिकल माइक्रोबायोलॉजिस्ट की दो दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए कही।
डॉ. बीएम कटोच ने कहा कि जरूरत ग्रामीण क्षेत्रों तक सामान्य चिकित्सकीय सुविधाओं के साथ माइक्रोऑर्गेनिज्म की जांच की सुविधाओं व माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट की कमी को पूरा करने की है। जिससे इनफेक्शन होने पर लोगों को सही समय पर सही जांच होने से सही इलाज मिल सके। भारत सरकार के 2024 तक देश को टीबी मुक्त बनाने की योजना के बारे में कहा कि बहुत तेजी से और अच्छे प्रयास किए जा रहे हैं। सफलता तो मिलेगी लेकिन कितनी, इसके नतीजे तो 2025 में पता चल पाएंगे। एसएन मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. प्रशान्त गुप्ता ने कहा कि किसी भी बीमारी में इलाज शुरु करने का आधार माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट हैं।
कार्यशाला का शुभारम्भ मुख्य अतिथि डॉ. वीएम कटोच, विवि की कुलपति आशु रानी, एसएन मेडिकल कालेज के प्राचार्य प्रो. प्रशांत गुप्ता, इंडियन एसोसिएशन ऑफ मेडिकल माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट प्रो. भारती मल्होत्रा, एसएन माइक्रोबयोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अंकुर गोयल, डॉ. शम्पा, डॉ. विनीता मित्तल ने सम्मिलित रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। संचालन डॉ. विकास गुप्ता ने किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से डॉ. अमिता जैन, डॉ. केएन प्रसाद, डॉ. मलिनी कपूर, डॉ. रंगमी, डॉ. मुनीष गुप्ता, डॉ. अतुल गर्ग आदि उपस्थित थे।
डॉ. बीएम अग्रवाल को लाइफ टाइम अचीवमेंट प्रदान किया
एसएन मेडिकल कालेज माइक्रोबॉयोलजी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. बीएम अग्रवाल को स्मृति चिन्ह व शॉल उढ़ाकर लाइफ टाइम अचीवमेंट प्रदान किया गया। एसजीपीजीआई के डॉ. टीएन ढोल को मरणोपरान्त सम्मानित किया गया। इस अवसर पर सोविनियर का भी विमोचन किया गया, जिसमें 300 रिसर्च पेपर पब्लिक किए गए हैं।
: उत्तर भारत में एच1एन1 स्वाइन फ्लू फैलने का खतराः डॉ. अतुल गर्ग
Fri, Feb 9, 2024
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फरवरी से अप्रैल और सितंबर से अक्टूबर तक आ सकते हैं केस, लखनऊ में छह केस मिले, नहीं है घातक
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दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारम्भ, पहले दिन हुआ 6 वर्कशॉप का आयोजन
आगरा। इंडियन एसोसिएशन ऑफ मेडिकल माइक्रोबायोलॉजिस्ट द्वारा आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में आज एसजीपीजीआइ, लखनऊ असिस्टेंट प्रोफेसर अतुल गर्ग ने बताया कि हर वर्ष वायरल संक्रमण को लेकर एडवाइजरी जारी की जाती है। इस बार फरवरी से लेकर मार्च तक और सितंबर से लेकर अक्टूबर तक स्वाइन फ्लू का संक्रमण फैल सकता है। लखनऊ में छह केस मिल चुके हैं लेकिन यह घातक नहीं है, उन्होंने बताया कि हर बार स्वाइन फ्लू का स्ट्रेन बदल रहा है, 2022 में एच3एन2 का संक्रमण फैला था, इस बार वायरस में बदलाव हुआ है और 2009 में फैले एच1एन1 से स्वाइन फ्लू फैलने की आशंका है, इसे लेकर स्वाइन फ्लू की वैक्सीन में भी बदलाव किया गया है।
टेमी फ्लू हो रही कारगर साबित
स्वाइन फ्लू की घातकता कम हुई है, साथ ही टेमी फ्लू दवा इस पर कारगर साबित हो रही है। ऐसे में स्वाइन फ्लू का संक्रमण घातक नहीं हैं। लेकिन जिन लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, इसमें मोटापा, मधुमेह, कैंसर, एचआइवी के मरीज शामिल हैं उन्हें परेशानी हो सकती है। गर्भवती महिलाएं व किसी भी ग तरह का ट्रांसप्लांट करा चुके मरीजों को भी ख्याल रखना होगा। अप्रैल के प्रथम सप्ताह तक स्वाइन फ्लू का संक्रमण खत्म हो जाएगा। इसकी दूसरी लहर अगस्त से सितम्बर के बीच आ सकती है।
सूक्ष्मजीवों की पहचान व जांच के लिए छह वर्कशॉप का आयोजन
कार्यशाला के तहत वैक्टीरिया, वायरस, फंगस जैसे सूक्ष्मजीव व उनसे होने वाली बीमारियों की पहचान के लिए एसएन मेडिकल कालेज में 6 वर्कशॉप का आयोजन किया गया। जिसमें 150 से अधिक प्रतिनिधियों ने विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त किया। कार्यशाला में 450 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इस अवसर पर आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. बीएम अग्रवाल, सचिव डॉ. अंकुर गोयल, सहसचिव डॉ. विकास कुमार, डॉ. आरती अग्रवाल, डॉ. प्रज्ञा शाक्य, डॉ. सपना गोयल, डॉ. पारुल गर्ग, डॉ. श्वेता सिंघल आदि मौजूद थीं।
10 फरवरी को बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण की जागरूकता के लिए निकलेगी वॉकथॉन
कार्यशाला के तहत 10 फरवरी को खंदारी परिसर स्थित जेपी सभागार से शहीद स्मारक तक वॉकथॉन का आयोजन किया जाएगा। जिसका उद्देश्य अस्पताल व नर्सिंग होम के अलावा घरेलू इलाज के दौरान निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट का सही तरीके से निस्तारण करने के प्रति आमजन में जागरूकता पैदा करना होगा। वॉकथॉन में एसएन मेडिकल कालेज के विद्यार्थियों, डॉक्टर, उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्यों सहित सैकड़ों लोग शामिल होंगे। जेपी सभागार में ही सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक साइंटिफिक सेशन आयोजित किए जाएंगे। साथ ही एंटीबायोटिक दवाओं के अनावश्यक प्रयोग व उसके कारण माइक्रोऑरगेनिज्म में दवाओं के प्रति पैदा होने वाली प्रतिरोधकता जैसे गम्भीर विषयों पर डॉक्टरों के साथ पैनल डिसकशन में चर्चा होगी। 300 से अधिक रिसर्च पेपर व पोस्टर का प्रस्तुतिकरण किया जाएगा।