‘किस्सा कहानी-8’ : गोलियों की आवाज से लोकतंत्र के सवालों तक पहुंची ‘सो एंड सो’ की कहानी
Pragya News 24
Sun, Aug 16, 2026
आगरा। साहित्यिक आयोजन ‘किस्सा कहानी-8’ में वरिष्ठ कथाकार शक्ति प्रकाश ने अपनी चर्चित कहानी ‘सो एंड सो’ का प्रभावशाली पाठ कर श्रोताओं को झकझोर दिया। कार्यक्रम का आयोजन रंगलीला एवं नई दिल्ली की कहानी पत्रिका कथादेश द्वारा शीरोज़ हैंग आउट में किया गया।
कहानी के एक दृश्य में दरोगा द्वारा सिपाहियों की ओर मुस्कुराकर देखने के बाद लगातार पांच गोलियां चलने और अगले दिन उसी हाईवे पर एक युवक द्वारा मोबाइल पर एनकाउंटर की तस्वीर देखते हुए उसे सामान्य घटना की तरह लेने का प्रसंग सामने आता है। इस मार्मिक और बेचैन करने वाले प्रसंग ने श्रोताओं को मौजूदा सामाजिक एवं राजनीतिक परिस्थितियों पर सोचने के लिए विवश किया।
कार्यक्रम की शुरुआत में रंगलीला के निर्देशक अनिल शुक्ल ने आयोजन की प्रगति और उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। कहानी पाठ से पूर्व ‘कहानी और समाज का सच’ विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई। विषय प्रवर्तन केंद्रीय हिंदी संस्थान के पूर्व निदेशक प्रो. रामवीर सिंह ने किया।
कहानी में समाज के सच को सामने लाना जरूरी
प्रो. रामवीर सिंह ने कहा कि भारतीय कहानी में समाज के सच को प्रभावी ढंग से सामने रखने की परंपरा को मुंशी प्रेमचंद ने मजबूत आधार दिया। उन्होंने आम लोगों के जीवन और उनकी समस्याओं को कहानी का विषय बनाया। बाद के कहानीकारों ने भी प्रेमचंद की इस परंपरा को आगे बढ़ाया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कथाकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता रामनाथ शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि शक्ति प्रकाश की कहानी में यथार्थ पूरी गहराई के साथ मौजूद है। उन्होंने कहा कि अस्सी के दशक में लेखक राजनीति से दूरी बनाए रखते थे, जबकि आज का लेखक राजनीति और सामाजिक परिस्थितियों पर अपनी प्रभावी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहा है।
कहानी ने उठाए समकालीन लोकतंत्र के सवाल
कहानी पाठ के बाद उपस्थित साहित्यप्रेमियों ने कथाकार शक्ति प्रकाश से संवाद किया और कहानी के विभिन्न पक्षों को लेकर सवाल पूछे।
आरबीएस कॉलेज के प्रो. इंद्र कुमार यादव ने कहा कि कहानी में समसामयिक विषयों को प्रभावी ढंग से उठाया गया है। श्री कृष्ण ने कहा कि कहानी वर्तमान लोकतंत्र के सामने मौजूद चुनौतियों को रेखांकित करती है। सीमान्त साहू ने कहानी में जन-जन की आवाज को अभिव्यक्ति देने की सराहना की।
ब्रिगेडियर विनोद दत्ता ने कहा कि उपभोक्तावादी संस्कृति ने हर चीज को तुरंत हासिल करने की चाह बढ़ा दी है। रमेश पंडित ने कहा कि कहानी सुनने के बाद इसकी देशज भाषा विशेष रूप से प्रभावी लगी, जो साहित्य को आम आदमी तक पहुंचाने के लिए जरूरी है। विशाल रियाज ने कहा कि आवाज दबाने के दौर में यह कहानी आम आदमी की आवाज को सामने लाती दिखाई देती है।
कार्यक्रम में रमेश पंडित ने धन्यवाद ज्ञापित किया, जबकि संचालन अर्जुन सवेदिया ने किया।
इस अवसर पर आकाशवाणी आगरा के पूर्व निदेशक नीरज जैन, शीरोज़ हैंग आउट के अजय तोमर, रामभरत उपाध्याय, डॉ. महेश धाकड़, डॉ. मधु भारद्वाज, वंदना तिवारी, मालती कुशवाह, अमरजीत सिंह, ज्योति खंडेलवाल, विशाल झा, मनु भाई पंड्या, दिनेश, सिद्धेश अरोरा, मोहम्मद आरिफ, हिना, शिव नारायण सिंह, अजय पचौरी, रोमी चौहान सहित साहित्यप्रेमी एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे।
Tags :
Agra News
Pragya News
Uttar Pradesh News
UP News
विज्ञापन
विज्ञापन
जरूरी खबरें
विज्ञापन