Fri 30 Oct 2026
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लिट आगरा : 'देयर इज़ ए घोस्ट इन माय रूम' पर रोचक परिचर्चा, रहस्य और विज्ञान के बीच हुआ सार्थक संवाद

आगरा। लिट आगरा संस्था की ओर से संजय प्लेस स्थित होटल फेयरफील्ड बाय मैरियट में प्रख्यात कला-संस्कृति उद्यमी एवं लेखक संजय के. रॉय की चर्चित पुस्तक 'देयर इज़ ए घोस्ट इन माय रूम: लिविंग विद द सुपरनेचुरल' के विमोचन एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विज्ञान, अध्यात्म और अलौकिक अनुभवों पर गंभीर एवं रोचक संवाद ने श्रोताओं को अंत तक बांधे रखा।

कार्यक्रम का शुभारंभ पुस्तक के लोकार्पण से हुआ। पुस्तक का विमोचन सेंट जॉन्स कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. एसपी सिंह, हरविजय बाहिया, डॉ. रंजना बंसल, डॉ. संदीप अग्रवाल, प्रो. निबीर घोष, डॉ. अशोक शर्मा तथा डॉ. राजीव भाटिया ने संयुक्त रूप से किया।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए निधि लाल ने लेखक का परिचय दिया। उन्होंने बताया कि संजय के. रॉय देश के अग्रणी सांस्कृतिक उद्यमियों में शामिल हैं। वे टीमवर्क आर्ट्स के प्रबंध निदेशक हैं तथा विश्वप्रसिद्ध जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के संस्थापक सदस्यों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें ब्रिटेन के यॉर्क विश्वविद्यालय द्वारा मानद डॉक्टरेट से सम्मानित किया जा चुका है।

परिचर्चा के दौरान नीलम मेहरोत्रा और सुधा कपूर ने लेखक से अलौकिक अनुभवों, आत्माओं और अदृश्य संसार से जुड़े प्रश्न पूछे। संजय के. रॉय ने स्पष्ट किया कि उनकी पुस्तक अंधविश्वास को बढ़ावा देने के लिए नहीं, बल्कि जीवन में घटित वास्तविक अनुभवों का ईमानदार दस्तावेज है। उन्होंने बताया कि बचपन में कोलकाता स्थित अपने पैतृक घर में उन्हें पहली बार किसी अदृश्य उपस्थिति का अनुभव हुआ, जिसके बाद भारत और विदेश यात्राओं के दौरान भी अनेक रहस्यमय घटनाओं ने उन्हें इस विषय पर गंभीरता से सोचने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने कहा कि विज्ञान का उद्देश्य प्रश्न पूछना और प्रमाण तलाशना है, जबकि कुछ मानवीय अनुभव ऐसे भी होते हैं जिन्हें तत्काल वैज्ञानिक कसौटी पर नहीं परखा जा सकता। हर अनजानी घटना को अंधविश्वास मानकर नकार देना भी उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक भूत-प्रेत की कहानियों का संग्रह नहीं, बल्कि स्मृतियों, यात्राओं, मानवीय रिश्तों, हास्य, रोमांच और जीवन के अनुत्तरित प्रश्नों की संस्मरणात्मक यात्रा है, जो पाठकों को विज्ञान और अध्यात्म के बीच संतुलित दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करती है।

इस अवसर पर पूजा बंसल एवं अनुपम बोहरा ने पुस्तक के चयनित अंशों का प्रभावशाली वाचन किया। हरविजय बाहिया ने पुस्तक को आत्मकथा, यात्रा-वृत्तांत और अलौकिक अनुभवों का अनूठा संगम बताते हुए कहा कि इसमें लेखक ने कोलकाता से लेकर लुटियंस दिल्ली और विदेशों तक के रहस्यमय अनुभवों का जीवंत चित्रण किया है।

कार्यक्रम में मनीष बंसल, रजनीश खंडेलवाल, विनोद महेश्वरी, पूनम सचदेवा, राशि गर्ग, कविता अग्रवाल, मोहित महाजन, श्वेता बंसल, दिव्या गोयल सहित बड़ी संख्या में साहित्य एवं संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे।

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