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: मन को जानिए, जीवन को सजाइए, विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर ‘पीड़ा को पावर बनाएं’ कार्यशाला में गूंजा संदेश

Pragya News 24

Sat, Oct 11, 2025
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  • फीलिंग्स माइंड्स और आईएसएमएचएए द्वारा विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर आयोजित की गई ‘पीड़ा को पावर बनाएं’ विषय पर कार्यशाला
  • डॉ. चीनू अग्रवाल ने कहा “मन को जानना ही मानसिक स्वास्थ्य का पहला कदम”

आगरा। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर फीलिंग्स माइंड्स संस्था एवं आईएसएमएचएए (ग्लोबल मूवमेंट फॉर मेंटल हेल्थ) के संयुक्त तत्वावधान में ‘पीड़ा को पावर बनाएं’ विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह आयोजन विमल विहार, सिकंदरा-बोदला रोड स्थित फीलिंग्स माइंड्स संस्था के कार्यालय पर हुआ।

संस्था की संस्थापक डॉ. चीनू अग्रवाल ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने वर्ष 1992 से विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाने की घोषणा की थी ताकि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर किया जा सके। उन्होंने कहा कि लोग अपने शारीरिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हैं। योग, प्राणायाम और संतुलित आहार अपनाते हैं, परंतु मानसिक स्वास्थ्य को अब भी संकीर्ण दृष्टि से देखते हैं। मानसिक स्वास्थ्य कोई दिमागी बीमारी नहीं, बल्कि अपने ‘मन को जानने का विज्ञान’ है।
डॉ. अग्रवाल ने आगे कहा कि प्रत्येक व्यक्ति दिनभर में कई बार नकारात्मक सोच में डूबता है। गुस्सा, भय या चिंता यदि बिना कारण बार-बार हो रही है, तो यह संकेत है कि मानसिक स्वास्थ्य डगमगा रहा है। ऐसे में अपने मन की बात साझा करना सबसे प्रभावी उपाय है। उन्होंने बताया कि मानसिक तनाव के कारण हर वर्ष विश्व को लगभग तीन सौ ट्रिलियन डॉलर का नुकसान होता है। आज अवसाद विश्व की सबसे बड़ी बीमारी बन चुकी है। लोग केवल अपनी समस्याओं से नहीं, बल्कि दूसरों की पीड़ा से भी मानसिक रूप से प्रभावित हो रहे हैं। हम भीड़ में रहते हुए भी अकेले हो गए हैं, क्योंकि हम झिझकते हैं अपने मन की बात कहने में। अब समय है कि हम अपने मन को स्वस्थ रखने के लिए खुलकर अपनी बात कहें, अपनी भावनाएं साझा करें। आप स्वयं अपने जीवन के नायक हैं, इस बात को स्वीकारें।

कार्यशाला के दूसरे सत्र में डॉ. चीनू अग्रवाल द्वारा लिखित पुस्तक ग्रेटीटिट्यूट नोट्स का विमोचन किया गया। इस पुस्तक में पूरे महीने के प्रत्येक दिन के लिए आभार व्यक्त करने की प्रेरक पंक्तियां और अभ्यास शामिल हैं, जो व्यक्ति को मानसिक रूप से संतुलित और सकारात्मक बनाए रखने में सहायक हैं।

तीसरे सत्र में डॉ. सत्य सरस्वत, डॉ. शिवकुमार सिंह, डॉ. सोनाली गोस्वामी, कर्नल संजय गोस्वामी, डॉ. राकेश त्यागी, डॉ. जेपी सिंह शाक्य, डॉ. रेनू अग्रवाल, अधिवक्ता नम्रता मिश्रा, डॉ. नीलम, हेतल देसाई, नीता उमेश ध्रुव, कशिश आदि ने अपने मनोभावों को साझा किया। प्रतिभागियों ने अपने भावों को शब्दों और रंगों के माध्यम से कैनवास पर उकेरा। कार्यशाला की व्यवस्थाएं डॉ. रविंद्र अग्रवाल, शैलेश कुमार जिंदल, रितु सिंह, रवीना, चारु और मनोज शर्मा आदि ने संभालीं।

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