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: रीलोकेट करने के कारण श्वान में बढ़ रहे रेबीज के मामले, नसबंदी प्रोग्राम हो रहा फेल

Pragya News 24

Fri, May 16, 2025
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  • देसी श्वानों में बढ़ती आक्रामकता व बढ़ते रेबीज के मामलों को रेजीडेन्शियल वेलफेयर सोसायटी की जागरूकता से ही किया जा सकता है समाप्त

आगरा। समाज में पहली रोटी गाय की और आखिरी रोटी श्वान की परम्परा टूटने व रेजीडेन्शियल वेलफेयर सोसायटियों (आरडब्ल्यूएस) द्वारा देसी श्वानों को रीलोकेट करना रेवीज के मामलों में इजाफे का मुख्य कारण है। श्वानों में नसबंदी प्रोग्राम भी फेल हो रहा है। परन्तु शहर की आरडब्ल्यूएस समस्या को समझकर उसे हल करने के बजाय सिर्फ छुटकारा चाहती हैं। हर कोई बस यही चाहते हैं कि श्वानों को उनके क्षेत्र से हटा दो, भरकर कहीं फेंक दो। सुप्रीम कोर्ट के आर्डर के बाद भी एबीसी का प्रोग्राम ठीक से नहीं चल पा रहा।

श्वानों की विदेशी ब्रीड के प्रति मोह के कारण अवैध रूप से चल रहे ब्रीडिंग सेन्टर और देशी श्वानों के प्रति लोगों में हीन भावना व नकारात्मकता को दूर करने के उद्देश्य से खंदारी स्थित कैस्पर्स होम पर आज एनीमल लवर्स द्वारा बैठक का आयोजन किया गया। एचएडब्ल्यूआर की प्रतिनिधि कैस्पर्स होम की निदेशक विनीता अरोड़ा ने कहा कि देसी श्वानों के भी कई फायदे हैं। आरडब्ल्यूएस द्वारा नगर निगम व संस्थाओं को रोकने के बजाय उनका सहयोग करना चाहिए। जो स्ट्रीट डॉग एग्रेसिव होते हैं, उसके पीछे की बजह हो सकती है। जिसका जो नेटिव प्लेस है उसे वहीं रहने दें। किसी के साथ बर्बरता न करें। उन्होंने संस्था के पास पहुंचे कई मामलों का उदाहरण देते हुए कहा कि लोग बोरों में भरकर श्वानों को नालों तक में फेंक आते हैं। जबकि सुप्रीम कोर्ट के सख्त आर्डर हैं कि आरडब्ल्यूएस को अपने आस-पास के एनीमल की रहने व खाने पीने की व्यवस्था करनी होगी। सहयोग न मिल पाने के कारण शहर की सभी आरडब्ल्यूएस में एनीमल वेलफेयर कमेटी का गठन करने में भी दिक्कत आ रही हैं। जानवरों के प्रति कानून की जानकारी न होने से क्षेत्रीय पुलिस भी सहयोग नहीं करती। बैठक में शहर की रेजीडेंशियल वेलफेयर सोसायटी को नगर निगम व संस्थाओं का सहयोग करने की पील की गई।

इस अवसर पर मुख्य रूप से यश रहेजा, गुंजन, सनी, डॉ. तूलिका अग्रवाल, शांतनु बंसल, अंकित शर्मा, प्रतिभा गोस्वामी, कुर गोस्वामी, गरिमा शर्मा, गुंजन आदि उपस्थित थे।

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